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अरुणाचल में चीन को भारत का करारा जवाब: 27 स्थानों को मिले आधिकारिक भारतीय नाम

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अगस्त 2026

चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलने की लगातार कोशिशों के बीच भारत ने बड़ा कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक नाम जारी कर दिए हैं। इन नामों को सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) के आधिकारिक नक्शों में शामिल किया गया है, जिससे इन क्षेत्रों पर भारत के संप्रभु और कानूनी अधिकार को और मजबूती मिली है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ परामर्श के बाद इन 27 स्थानों की पहचान की गई है। इनमें 21 भू-भाग, चार दर्रे (पास), एक झील और एक स्मारक शामिल हैं। सूची में लोंगजू (Longju) भी शामिल है, जिस पर 1959 से चीन का नियंत्रण है, लेकिन भारत उसे अपने दावे वाले क्षेत्र का हिस्सा मानता है।

सरकार का कहना है कि इन स्थानों को आधिकारिक नक्शों में दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सही पहचान सुनिश्चित करना, प्रशासनिक स्पष्टता लाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे भूमि अभिलेख, राजस्व रिकॉर्ड, जनगणना, सीमा सड़क निर्माण और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी स्पष्टता आएगी।

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में चीन कई बार अरुणाचल प्रदेश के दर्जनों स्थानों को अपने स्तर पर नए नाम देकर उन्हें तथाकथित “दक्षिण तिब्बत” का हिस्सा बताने की कोशिश करता रहा है। भारत लगातार इन दावों को खारिज करता आया है और स्पष्ट कहता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।

इस वर्ष अप्रैल में भी चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 23 स्थानों के नए नाम जारी किए थे। तब विदेश मंत्रालय ने इसे “भ्रामक और निराधार प्रयास” बताते हुए कहा था कि काल्पनिक नाम रखने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती। विदेश मंत्रालय ने चीन से ऐसे कदमों से बचने की अपील की थी, जो दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को प्रभावित करें।

अधिकारियों का मानना है कि भारत का यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखता है। आधिकारिक नक्शों में किसी स्थान का दर्ज होना उसके प्रशासनिक, कानूनी और भू-राजनीतिक महत्व को मजबूत करता है और भविष्य में सीमा प्रबंधन तथा अवसंरचना विकास के लिए स्पष्ट आधार उपलब्ध कराता है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और चीन 2020 से शुरू हुए सीमा गतिरोध के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। इसके बावजूद चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश पर दावे और नाम बदलने की कवायद जारी रही है। ऐसे में भारत का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े किसी भी मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है।

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