राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अगस्त 2026
संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव गुरुवार को राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया, जब राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को विपक्ष की भावनाएं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाने का निर्देश दिया। पिछले कई दिनों से जारी गतिरोध के बीच सदन में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा रिजिजू के बीच तीखी नोकझोंक हुई। खड़गे ने सरकार पर ही संसद नहीं चलने देने का आरोप लगाते हुए कहा—“सदन को हम नहीं, सरकार बाधित कर रही है।” इसके बाद सभापति का सरकार से विपक्ष की बात गृह मंत्री तक पहुंचाने के लिए कहना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मानसून सत्र का यह 14वां दिन था और सुबह से ही राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के नारे और विरोध के कारण कार्यवाही सामान्य तरीके से नहीं चल सकी। खास तौर पर प्रश्नकाल और शून्यकाल जैसे गैर-विधायी कामकाज के समय गतिरोध देखने को मिला। सुबह के सत्र में सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद विपक्ष की नारेबाजी के बीच सदस्यों के शून्यकाल के वक्तव्य सुनाई देना मुश्किल होने लगा। इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाकर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को निशाने पर लिया।
रिजिजू ने सदन के दो नियमों का हवाला देते हुए कहा कि किसी सदस्य के भाषण को बाधित नहीं किया जाना चाहिए और यदि कोई सदस्य बार-बार अपनी पुरानी दलील दोहरा रहा हो तो सभापति के पास हस्तक्षेप का अधिकार है। इसके बाद रिजिजू ने खड़गे पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि “खड़गे साहब हर दिन एक ही बात कह रहे हैं। बार-बार एक ही बात दोहराने के खिलाफ भी नियम है।” सरकार की तरफ से यह संकेत था कि विपक्ष लगातार उन्हीं मांगों को उठाकर सदन के कामकाज को बाधित कर रहा है।
लेकिन खड़गे ने सरकार के इस आरोप को पलट दिया। नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि विपक्ष संसद को बाधित नहीं करना चाहता, बल्कि सरकार उन मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है जिन्हें विपक्ष लगातार उठा रहा है। उन्होंने साफ कहा—“The House is being disrupted by the government and not us” यानी “सदन हम नहीं, सरकार बाधित कर रही है।” इस बयान के साथ विपक्ष ने संसद में जारी गतिरोध की जिम्मेदारी सीधे सरकार पर डाल दी।
इस टकराव के बीच सभापति सी.पी. राधाकृष्णन का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा कि वह विपक्ष की भावनाओं को गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाएं। सभापति की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विपक्ष लगातार गृह मंत्री से जवाब और सदन में उनकी ओर से प्रतिक्रिया की मांग कर रहा है। यानी सदन के भीतर चल रहे शोर-शराबे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सभापति ने सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का रास्ता निकालने की कोशिश की।
मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अविश्वास लगातार बढ़ा है। विपक्ष का कहना है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर केवल सदन चलाने की अपील पर्याप्त नहीं है, सरकार को उन सवालों का जवाब भी देना होगा जिन्हें वह कई दिनों से उठा रहा है। वहीं सरकार का आरोप है कि विपक्ष नारेबाजी और व्यवधान के जरिए संसदीय कामकाज को रोक रहा है। इसी टकराव का परिणाम यह है कि प्रश्नकाल और शून्यकाल जैसी कार्यवाही भी बार-बार प्रभावित हो रही है।
गुरुवार का घटनाक्रम इसलिए खास है क्योंकि अब मामला केवल सरकार बनाम विपक्ष के आरोप तक सीमित नहीं रहा। राज्यसभा के सभापति ने स्वयं संसदीय कार्य मंत्री से विपक्ष की भावना गृह मंत्री तक पहुंचाने को कहा है। इससे विपक्ष की उस मांग को नया राजनीतिक वजन मिला है जिसमें वह चाहता है कि गृह मंत्री स्वयं सदन के सामने आकर संबंधित मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करें।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सभापति के निर्देश के बाद सरकार और गृह मंत्री की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या इससे संसद में पिछले कई दिनों से जारी गतिरोध खत्म करने का कोई रास्ता निकलता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं—सरकार विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगा रही है, जबकि विपक्ष का जवाब है कि संसद सवाल पूछने से नहीं, उन सवालों का जवाब न देने से ठप हो रही है।




