राष्ट्रीय / राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 अगस्त 2026
“अजीब दौर है—युवा नौकरी मांग रहे हैं और प्रधानमंत्री उन्हें माफ कर रहे हैं”
देश में छात्र आंदोलनों को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोला है। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की प्रदर्शनकारी छात्रों को लेकर की गई ‘क्षमा’ संबंधी टिप्पणी को ही उलटकर उनके सामने सवाल खड़ा कर दिया। राहुल ने कहा कि देश एक अजीब दौर से गुजर रहा है—छात्र सड़कों पर हैं, वे रोजगार मांग रहे हैं, निष्पक्ष परीक्षाएं चाहते हैं और ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो वास्तव में काम करे; लेकिन दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री उन्हें ‘माफ’ कर रहे हैं। राहुल का सीधा सवाल था—“उन्हें माफ करने वाले वह कौन होते हैं?” और फिर इससे भी तीखा प्रश्न—“उन्हें यह अधिकार किसने दिया कि वह भारत के भविष्य को माफ करें?”
राहुल का सबसे बड़ा हमला—“युवा अपराधी नहीं, देश का भविष्य हैं; माफी किस बात की?”
राहुल गांधी ने पूरे विवाद की राजनीतिक दिशा ही बदलने की कोशिश की। उनका तर्क था कि रोजगार, निष्पक्ष परीक्षा और बेहतर शिक्षा मांग रहे युवाओं को इस तरह देखना ही गलत है मानो उनसे कोई अपराध हुआ हो और सत्ता उन्हें क्षमा प्रदान कर रही हो। कांग्रेस ने राहुल के वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए सोशल मीडिया पर भी यही सवाल उठाया—जब छात्र नौकरी, निष्पक्ष परीक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग लेकर सड़कों पर हैं तो प्रधानमंत्री उन्हें आखिर किस बात के लिए क्षमा कर रहे हैं? राहुल गांधी की राजनीतिक लाइन साफ दिखाई दी—सरकार युवाओं को आंदोलनकारी या ‘भटके हुए बच्चे’ समझकर उनसे ऊपर खड़ी होने की कोशिश न करे; लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है, जनता सरकार की क्षमा की मोहताज नहीं।
‘Forgiveness’ पर राहुल का पलटवार बना राजनीतिक हथियार
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आंदोलनकारी छात्रों के संदर्भ में इस्तेमाल की गई ‘क्षमा’ की भाषा अब कांग्रेस के हाथ बड़ा राजनीतिक हथियार बनती दिखाई दे रही है। राहुल गांधी ने इसी एक शब्द को पकड़कर सत्ता और युवा के रिश्ते का सवाल खड़ा कर दिया। उनका संदेश था कि छात्र सरकार के सामने क्षमादान मांगने नहीं निकले हैं। वे अपने भविष्य से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। यदि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी है तो उसका जवाब चाहिए, यदि रोजगार का संकट है तो नीति चाहिए और यदि शिक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष है तो संवाद चाहिए। राहुल ने इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री की भाषा पर सवाल उठाते हुए इसे ऐसी मानसिकता से जोड़ा जिसमें सत्ता स्वयं को नागरिकों के ऊपर देखने लगती है।
“भारत के भविष्य को माफ करने का अधिकार आपको कहां से मिला?”
राहुल गांधी की इस टिप्पणी का सबसे आक्रामक हिस्सा यही था। उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं को सीधे “भारत का भविष्य” बताते हुए प्रधानमंत्री से पूछा कि उन्हें देश के भविष्य को क्षमा करने का अधिकार आखिर कहां से मिलता है। इस एक सवाल के जरिए कांग्रेस ने राजनीतिक बहस को छात्र आंदोलन की मांगों से आगे सत्ता की जवाबदेही तक पहुंचाने की कोशिश की है। विपक्ष का तर्क अब यह बन रहा है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि युवाओं की शिकायतों पर उसने क्या किया, न कि यह कि वह युवाओं को क्षमा करती है या नहीं। यानी कांग्रेस प्रधानमंत्री की ‘क्षमा’ को उदारता के संदेश के बजाय सत्ता के अहंकार के राजनीतिक प्रतीक के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
मोदी के बाद RSS पर भी राहुल का हमला—“इसके पीछे बेहद खतरनाक और जहरीला विचार”
राहुल गांधी केवल प्रधानमंत्री तक नहीं रुके। उन्होंने प्रधानमंत्री, उनके सहयोगियों और RSS की राजनीतिक-सांस्कृतिक सोच पर भी गंभीर हमला बोला। राहुल ने आरोप लगाया कि इस सोच के पीछे एक “बहुत खतरनाक और जहरीला विचार” मौजूद है। उनके अनुसार यह विचार भारत के अलग-अलग राज्यों की अपनी ऐतिहासिक पहचान, भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता को पर्याप्त महत्व नहीं देता और RSS द्वारा परिभाषित इतिहास तथा भाषा को प्राथमिकता देना चाहता है। यह राहुल गांधी का आरोप है और RSS/BJP का पक्ष इससे अलग हो सकता है, लेकिन राजनीतिक रूप से राहुल ने छात्र आंदोलन को अब केवल परीक्षा और रोजगार तक सीमित न रखते हुए उसे भारत की बहुलता और संघीय पहचान की अपनी व्यापक वैचारिक लड़ाई से जोड़ दिया है।
राहुल ने Gen-Z के आंदोलन को दिया बड़ा राजनीतिक अर्थ—“अपने तरीके से Idea of India की रक्षा कर रहे हैं”
राहुल गांधी ने सड़कों पर उतर रहे छात्रों को महज नाराज परीक्षार्थियों के रूप में नहीं पेश किया। उन्होंने इस आंदोलन को भारत की विविधता और पहचान की लड़ाई से जोड़ते हुए कहा कि भारत अपनी संस्कृतियों, भाषाओं और इतिहास को किसी के द्वारा कुचले जाने को स्वीकार नहीं करेगा और छात्र अपने तरीके से “Idea of India” की रक्षा कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक विस्तार है। परीक्षा में निष्पक्षता और रोजगार जैसे सीधे युवा मुद्दों को यदि संविधान, विविधता, भाषाई पहचान और संघीय ढांचे के प्रश्न से जोड़ दिया जाता है तो छात्र असंतोष का राजनीतिक दायरा बहुत बड़ा हो सकता है। राहुल गांधी स्पष्ट रूप से उसी दिशा में अपनी राजनीतिक कथा तैयार करते दिखाई दे रहे हैं।
सवाल अब BJP के सामने—माफी क्यों, जवाब क्यों नहीं?
राहुल गांधी के हमले के बाद राजनीतिक सवाल बेहद सीधा हो गया है—यदि छात्र रोजगार मांग रहे हैं तो सरकार रोजगार पर जवाब दे; यदि वे निष्पक्ष परीक्षा मांग रहे हैं तो परीक्षा व्यवस्था पर जवाब दे; यदि पेपर लीक को लेकर गुस्सा है तो दोषियों और व्यवस्था की जवाबदेही बताए; यदि शिक्षा व्यवस्था पर सवाल हैं तो सुधार का रोडमैप सामने रखे। ऐसे में ‘क्षमा’ की भाषा विपक्ष को यह पूछने का मौका दे रही है कि आखिर अपराध किसने किया है—सवाल पूछने वाले युवाओं ने या उन व्यवस्थागत विफलताओं ने जिनके खिलाफ वे सड़कों पर आए?
कांग्रेस ने राहुल के सवाल को बनाया नारा—“Who is he to forgive them?”
राहुल गांधी के भाषण के बाद कांग्रेस ने उनके सबसे तीखे सवाल को सोशल मीडिया पर जोरदार तरीके से आगे बढ़ाया। पार्टी ने लिखा कि छात्र सड़कों पर हैं, रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाएं और काम करने वाली शिक्षा व्यवस्था मांग रहे हैं, जबकि दूसरी ओर प्रधानमंत्री उन्हें क्षमा कर रहे हैं। इसके बाद कांग्रेस ने राहुल गांधी का सवाल उछाला—“Who is he to forgive them?” यानी “उन्हें माफ करने वाले वह कौन होते हैं?” यह वाक्य अब कांग्रेस की युवा राजनीति के लिए एक धारदार राजनीतिक नारे का रूप ले सकता है, क्योंकि इसमें रोजगार, परीक्षा, आंदोलन और सत्ता की जवाबदेही—चारों सवाल एक साथ समा जाते हैं।
8 अगस्त को प्रयागराज पर नजर—‘छात्रों की गूंज’ से आंदोलन को बड़ा मंच देने की तैयारी
राहुल गांधी का यह हमला ऐसे समय आया है जब कांग्रेस युवा और छात्र असंतोष को लगातार राजनीतिक मुद्दा बना रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक पार्टी 8 अगस्त को प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत एक बड़े छात्र कार्यक्रम की तैयारी कर रही है। ऐसे में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से राहुल गांधी का भाषण केवल तत्काल प्रतिक्रिया भर नहीं माना जाएगा। यह संकेत भी है कि कांग्रेस आने वाले दिनों में रोजगार, परीक्षा की निष्पक्षता, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक अभियान की शक्ल देने की कोशिश करेगी।
लड़ाई अब ‘किसे माफ किया’ से आगे—‘जवाब किसे देना है’ पर पहुंची
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की ‘क्षमा’ वाली राजनीति को उसी के विरुद्ध मोड़ने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री का संदेश जहां आंदोलनकारी युवाओं के प्रति उदारता दिखाने के रूप में प्रस्तुत किया गया, वहीं राहुल ने पूछा कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री किसी नागरिक को क्षमा करने की स्थिति में स्वयं को क्यों देखें। लोकतंत्र में युवा प्रधानमंत्री की प्रजा नहीं हैं, वे नागरिक हैं; सरकार उनकी संरक्षक सत्ता नहीं, उनके प्रति जवाबदेह व्यवस्था है। यही कांग्रेस के हमले का राजनीतिक केंद्र है।
और इसीलिए राहुल गांधी का सवाल आने वाले दिनों में बार-बार सुनाई दे सकता है—
“छात्र नौकरी मांग रहे हैं। निष्पक्ष परीक्षा मांग रहे हैं। बेहतर शिक्षा मांग रहे हैं। उन्होंने ऐसा कौन-सा अपराध किया है कि प्रधानमंत्री उन्हें माफ करेंगे?” और सबसे बड़ा सवाल—“भारत के भविष्य को माफ करने वाले आप कौन होते हैं?”




