राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 अगस्त 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशभर में नशे और मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ की शुरुआत की। यह अभियान अगले 100 हफ्तों तक प्रत्येक रविवार चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नशे से दूर रखने के साथ ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री ने अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि आने वाले 100 रविवार, नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम बनेंगे। हर रविवार युवाओं को जोड़ने के लिए खेल, कला, संस्कृति, ध्यान और दूसरी रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
‘देश को आपकी ऊर्जा और प्रतिभा की जरूरत’
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को भारत की ‘अमृत पीढ़ी’ बताते हुए कहा कि आने वाले 20-25 वर्षों में यही पीढ़ी देश का नेतृत्व करेगी और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि देश को युवाओं की ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा की जरूरत है, इसलिए युवाओं का नशे से दूर रहना उनके अपने भविष्य के साथ देश के भविष्य के लिए भी जरूरी है।
ड्रग तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ड्रग तस्करों और नशीले पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है। अभियान का विशेष जोर युवाओं में ड्रग और अन्य नशीले पदार्थों की लत को रोकने पर रहेगा।
सरकार ने इस अभियान को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से भी जोड़ा है। संदेश साफ है कि स्वस्थ और नशामुक्त युवा आबादी के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं किया जा सकता।
दुनिया के कई देशों ने भी छेड़ी नशे के खिलाफ मुहिम
नशीले पदार्थों के खिलाफ बड़े अभियान दुनिया के कई देशों में चलाए जा चुके हैं। अमेरिका में 1971 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने ड्रग्स को बड़ी सार्वजनिक चुनौती बताते हुए व्यापक अभियान शुरू किया था। ब्रिटेन में मार्गरेट थैचर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने पर जोर दिया था।
संयुक्त राष्ट्र की UNODC भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध ड्रग कारोबार रोकने, सीमाओं पर निगरानी मजबूत करने और नशीली फसलों पर निर्भर लोगों के लिए वैकल्पिक आजीविका विकसित करने की दिशा में काम करती रही है।
अब भारत का 100 सप्ताह लंबा अभियान इस वैश्विक लड़ाई में एक बड़ा सामाजिक प्रयोग भी होगा। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अभियान केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित रहता है या परिवारों, स्कूल-कॉलेजों, स्वास्थ्य सेवाओं, पुनर्वास व्यवस्था और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जोड़कर नशे की समस्या से जमीनी स्तर पर मुकाबला कर पाता है।




