राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/किशनगंज | 29 जुलाई 2026
NEET पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बीच बिहार के किशनगंज जिले से एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक युवक ने दावा किया है कि वह पिछले चार महीनों से रूस में रह रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसे बिहार में छात्र आंदोलन से जुड़े एक FIR में नामजद कर दिया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
वीडियो में खुद को बहादुरगंज नगर पंचायत के वार्ड-12 का निवासी मोहम्मद सदाकत बताने वाला युवक कहता है कि 24 जुलाई को LRP चौक पर हुए NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के मामले में प्रशासन ने उसका नाम FIR में शामिल किया, जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में है। उसने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि उसका नाम मामले से हटाया जाए और ऐसा होने पर वह प्रशासन का आभारी रहेगा।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। हालांकि, समाचार एजेंसी PTI और अन्य मीडिया संस्थानों ने स्पष्ट किया है कि वे वीडियो की प्रामाणिकता और युवक के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाए हैं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए किशनगंज के पुलिस अधीक्षक हरि मोहन शुक्ला ने न तो युवक के दावे की पुष्टि की और न ही उसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को आंदोलन से जुड़े मामलों में कोई शिकायत है, तो वह पुलिस के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है और उसका निस्तारण किया जाएगा।
बताया गया कि बिहार पुलिस के आधिकारिक ‘X’ अकाउंट से भी इस वायरल वीडियो पर संज्ञान लेने संबंधी एक पोस्ट किया गया था, लेकिन बाद में वह पोस्ट हट गया या दिखाई नहीं दिया।
इस बीच बिहार सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज FIR, शिकायतें और नोटिस वापस लिए जाएंगे। राज्य गृह विभाग के अनुसार, 26 जुलाई सुबह 6 बजे से पहले आंदोलन के संबंध में दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार ने यह भी कहा है कि इन मामलों में हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्यव्यापी बंद और छात्र आंदोलन के दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की थी। यह निर्णय छात्र संगठनों और Cockroach Janta Party (CJP) सहित विभिन्न पक्षों की मांग के बाद लिया गया।
रूस में मौजूद होने का दावा करने वाले युवक का वीडियो सामने आने के बाद आंदोलन से जुड़े मामलों में नामजदगी की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, जब तक पुलिस जांच पूरी नहीं होती और आधिकारिक तौर पर तथ्यों की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इस दावे को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। अब इस मामले में प्रशासन की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।




