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पेपर लीक कानून पर सरकार घिरी: “कानून बना, लेकिन एक भी दोषी को सजा नहीं”

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सदन आज ऐसे कानून में संशोधन पर चर्चा कर रहा है, जिसे वर्ष 2024 में पहले ही पारित किया जा चुका है, लेकिन अब तक सरकार एक भी पेपर लीक आरोपी को सजा दिलाने में सफल नहीं हुई है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक के दोषियों के लिए सजा को और कड़ा करना है, लेकिन सवाल यह है कि जब मौजूदा कानून के तहत ही किसी अपराधी को सजा नहीं मिली, तो केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान कैसे होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के साथ दोहरा रवैया अपना रही है। उनके अनुसार, प्रदर्शन करने वाले छात्रों की पहचान फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए सार्वजनिक की जा रही है, लेकिन पेपर लीक के आरोपियों की पहचान और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को उसी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया।

कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार वास्तविक समस्या के समाधान के बजाय नई-नई समितियां बनाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि केवल समितियों के गठन से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि उनकी सिफारिशों को जमीन पर लागू करना भी जरूरी है।

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि राधाकृष्णन समिति की अब तक एक भी महत्वपूर्ण सिफारिश लागू नहीं की गई है। उन्होंने नई गठित समिति की संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें एक पूर्व आईबी प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक गौ-मूत्र विशेषज्ञ को शामिल किया गया है, जबकि छात्रों और परीक्षा प्रणाली के विशेषज्ञों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि पेपर लीक के मामलों में त्वरित जांच, दोषियों को शीघ्र सजा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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