नई दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | 27 जुलाई 2026
NEET पेपर लीक के खिलाफ 36 दिनों तक चले देशव्यापी आंदोलन के खत्म होने के बाद अब प्रदर्शनकारियों पर कथित कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। Cockroach Janta Party (CJP) ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में आंदोलन में शामिल छात्रों और दूसरे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है या गिरफ्तार किया जा रहा है। संगठन ने केंद्र से अपना वादा निभाने को कहा है।
CJP का सवाल—जब कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया था तो गिरफ्तारियां क्यों?
CJP का कहना है कि आंदोलन समाप्त करते समय केंद्रीय मंत्रियों की ओर से भरोसा दिया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। इसके बावजूद अलग-अलग राज्यों से हिरासत और गिरफ्तारी की खबरें सामने आ रही हैं।
CJP प्रवक्ता सौरव दास की ओर से साझा बयान में संगठन ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। CJP ने मांग की है कि हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा किया जाए और आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज FIR वापस ली जाएं।
36 दिन के आंदोलन के बाद बनी थी सहमति
NEET विवाद को लेकर CJP का आंदोलन लगातार 36 दिनों तक चला था। संगठन की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था। प्रधान के पद छोड़ने के बाद CJP ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। अब CJP इसी आश्वासन को आधार बनाकर केंद्र से हस्तक्षेप की मांग कर रही है।
‘छात्रों को छोड़ें, मुकदमे वापस लें’
CJP ने अपनी मांग बेहद स्पष्ट रखी है—सभी हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए और FIR तत्काल वापस ली जाएं। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर वह “आगे जरूरी कदम” उठाएगा।
हालांकि CJP ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसका अगला कदम क्या होगा, लेकिन 36 दिन तक चले आंदोलन की पृष्ठभूमि को देखते हुए इस चेतावनी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कानूनी लड़ाई की भी तैयारी
संगठन केवल राजनीतिक दबाव बनाने तक सीमित नहीं है। CJP के मुताबिक उसकी कानूनी टीम संबंधित राज्यों में वकीलों के साथ संपर्क और समन्वय कर रही है, ताकि हिरासत या गिरफ्तारी का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता दिलाई जा सके और उनकी रिहाई के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
इससे संकेत मिलता है कि यदि मामला जल्द नहीं सुलझा तो आंदोलन के बाद अब लड़ाई अदालतों तक भी पहुंच सकती है।
आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन टकराव नहीं?
यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि कुछ दिन पहले तक सरकार और आंदोलनकारियों के बीच तनाव कम होता दिखाई दे रहा था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन वापस ले लिया था और इसे लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता बताया गया था।
लेकिन अब गिरफ्तारी और FIR का मुद्दा सामने आने से सरकार और CJP के बीच टकराव का नया मोर्चा खुल सकता है। संगठन का सवाल सीधा है—यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया था, तो उस भरोसे का पालन जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
अब केंद्र के रुख पर नजर
मामला अब केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आंदोलन समाप्त कराते समय सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बने भरोसे से भी जुड़ गया है। यदि संबंधित राज्यों में दर्ज मामलों और हिरासत को लेकर जल्द समाधान नहीं निकलता, तो CJP फिर से आक्रामक रुख अपना सकती है।
36 दिन का आंदोलन भले समाप्त हो चुका हो, लेकिन CJP ने साफ संकेत दे दिया है—प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और FIR के सवाल पर वह पीछे हटने को तैयार नहीं है। अब नजर केंद्र पर है कि वह दिए गए आश्वासन को लागू कराने के लिए क्या कदम उठाता है।




