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प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का हमला: केजरीवाल बोले ‘लोकतंत्र की जीत’, खड़गे ने कहा ‘मोदी की जिद हारी’

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने इसे केवल एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं, बल्कि देशभर में चले छात्र आंदोलन और लोकतांत्रिक दबाव की बड़ी जीत बताया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तक विपक्षी नेताओं ने आंदोलनकारी छात्रों को इसका श्रेय देते हुए मोदी सरकार पर तीखे राजनीतिक हमले किए हैं।

प्रधान ने शनिवार को NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह से जारी विरोध के बीच अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया। इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच जश्न शुरू हो गया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने इसे बड़ी जीत बताते हुए साफ किया कि यह संघर्ष का अंत नहीं बल्कि “सिर्फ शुरुआत” है।

केजरीवाल: छात्रों ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया

अरविंद केजरीवाल ने प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र और छात्र शक्ति की जीत के रूप में पेश किया। उनका राजनीतिक संदेश साफ था कि लंबे समय तक मांग को नजरअंदाज करने के बावजूद आखिरकार सरकार को युवाओं के दबाव के आगे फैसला लेना पड़ा। केजरीवाल इससे पहले भी आंदोलन के दौरान सरकार के रवैये और प्रधानमंत्री के पेपर लीक संबंधी आश्वासनों पर सवाल उठा चुके थे।

खड़गे: आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रधान के इस्तीफे को छात्रों और विपक्ष के संघर्ष की सफलता के तौर पर देखा। कांग्रेस पिछले कई दिनों से इस मुद्दे पर सरकार को संसद के भीतर और बाहर घेर रही थी। खड़गे ने राज्यसभा में भी स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा था कि पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो, उसके बाद चर्चा होगी।

प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी प्रतिक्रिया का केंद्रीय स्वर यही रहा कि सरकार ने यह फैसला स्वेच्छा से नहीं, बल्कि बढ़ते छात्र और राजनीतिक दबाव के बाद लिया। विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका भी करार दिया।

राहुल गांधी के रुख को भी मिली राजनीतिक बढ़त

इस घटनाक्रम ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस आक्रामक रुख को भी राजनीतिक बढ़त दी है, जिसके तहत विपक्ष ने साफ कर दिया था कि प्रधान के इस्तीफे के बिना संसद में सामान्य कामकाज मुश्किल होगा। गुरुवार तक विपक्षी दलों का बड़ा हिस्सा इस मांग पर एकजुट था और सरकार लगातार संसद में चर्चा की अपील कर रही थी।

इस्तीफे से पहले कई दिनों तक सरकार का रुख यही था कि वह NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष का कहना था कि जवाबदेही पहले, चर्चा बाद में। शनिवार को प्रधान के इस्तीफे के साथ यह राजनीतिक गतिरोध निर्णायक रूप से बदल गया।

विपक्ष का संदेश—यह सिर्फ CJP की नहीं, छात्रों की जीत

विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं में एक बात लगभग समान दिखाई दी—इस जीत का श्रेय आंदोलनकारी युवाओं को दिया गया। जंतर-मंतर पर कई सप्ताह से डटे प्रदर्शनकारियों ने प्रधान के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग पूरी होने के रूप में देखा। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने भी इस्तीफे को हाल के वर्षों के सबसे बड़े युवा आंदोलनों में से एक की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में दर्ज किया है।

लेकिन प्रधान का इस्तीफा इस विवाद का आखिरी अध्याय नहीं माना जा रहा। पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून, परीक्षा व्यवस्था में सुधार, NTA की जवाबदेही और प्रभावित छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दे अभी बाकी हैं। इसलिए विपक्ष और आंदोलनकारी नेतृत्व दोनों का संकेत है कि एक इस्तीफे के साथ आंदोलन की पहली बड़ी मांग जरूर पूरी हुई है, लेकिन शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।

यही कारण है कि प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक लड़ाई का नैरेटिव तेजी से बदल रहा है—कल तक सवाल था, “क्या सरकार झुकेगी?” अब सवाल है, “छात्र आंदोलन की अगली मांग क्या होगी?”

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