राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर शनिवार को जंतर-मंतर पहुंचते ही CJP के प्रदर्शनकारियों के बीच जश्न शुरू हो गया। लंबे समय से प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े आंदोलन के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने इसे छात्र शक्ति की बड़ी जीत बताया, लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि इसे आंदोलन का अंत नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह बड़ी जीत है। इससे साबित होता है कि देश संविधान से चलता है। यह तो बस शुरुआत है।”
इस्तीफे की सूचना दीपके को फोन पर मिली। खबर मिलते ही उन्होंने वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों से कहा, “हमने कर दिखाया। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।” इसके बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई और छात्र एक-दूसरे को बधाई देते दिखाई दिए।
लिखित पुष्टि तक जंतर-मंतर नहीं छोड़ने का ऐलान
CJP ने प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया है, लेकिन तत्काल प्रदर्शन स्थल खाली करने से इनकार किया। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि जब तक इस्तीफे और संबंधित फैसलों की लिखित पुष्टि नहीं मिल जाती, प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर बने रहेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP की तीन प्रमुख मांगों में सबसे महत्वपूर्ण मांग थी। सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को हुई बातचीत के बाद संगठन ने दावा किया था कि उसकी दो अन्य मांगों पर सरकार ने सैद्धांतिक सहमति जताई है, जबकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए एक दिन का समय मांगा गया था। इसके करीब 24 घंटे बाद प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया।
प्रधान ने इस्तीफे में उठाया ‘राष्ट्रविरोधी ताकतों’ का मुद्दा
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के साथ देश के युवाओं के नाम एक विस्तृत पत्र भी जारी किया। इसमें उन्होंने NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा आयोजित कराई।
प्रधान ने अपने फैसले को छात्रों के भविष्य और देश की एकता से जोड़ते हुए कहा कि जंतर-मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में पैदा हुई परिस्थितियों का “राष्ट्रविरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें”, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को भ्रम और गलत सूचनाओं के जाल में नहीं फंसने दिया जाना चाहिए।
हालांकि, अपने पत्र में प्रधान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किन कथित “राष्ट्रविरोधी ताकतों” की ओर था।
वांगचुक के पीछे हटने के बाद भी मांग पर डटे रहे दीपके
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंची इस लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया था जब सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। इसके बावजूद CJP और अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वापस नहीं ली। संगठन ने स्पष्ट कर दिया था कि इस मुद्दे पर इससे कम कोई समाधान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब प्रधान के इस्तीफे के बाद दीपके के “यह तो बस शुरुआत है” वाले बयान ने संकेत दिया है कि CJP आगे भी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधारों से जुड़े मुद्दों पर दबाव बनाए रख सकता है।
इस बीच, प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव दिखाई दिया। प्रदर्शन स्थल के बाहरी बैरिकेड्स पर पुलिसकर्मी अपेक्षाकृत सहज नजर आए और प्रवेश के दौरान लोगों के नाम तथा सोशल मीडिया अकाउंट दर्ज करने जैसी जांच में भी कमी दिखाई दी।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन की सबसे बड़ी मांग पूरी होने के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन अभिजीत दीपके ने जिस तरह इसे “अंत नहीं, शुरुआत” बताया है, उससे साफ संकेत है कि जंतर-मंतर से उठी यह लड़ाई अब केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित रखने के मूड में नहीं है।




