राष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
दिल्ली में सुरक्षा और कड़ी, छत्तीसगढ़ से एयरलिफ्ट होंगी 10 अतिरिक्त CRPF कंपनियां
NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। केंद्र ने छत्तीसगढ़ से CRPF की 10 अतिरिक्त कंपनियों को एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं CJP आंदोलन के पीछे कथित विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान की भूमिका के आरोपों पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि उसके पास इस संबंध में साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब आंदोलन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं और दिल्ली से शुरू हुआ छात्र विरोध देश के कई शहरों तक फैलता दिखाई दे रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी में जारी विरोध-प्रदर्शनों और आने वाले दिनों की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की जा रही है। गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा के बाद उन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की इकाइयों को भी निर्धारित समय से पहले दिल्ली पहुंचने को कहा गया है, जिन्हें स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा व्यवस्था के लिए राजधानी में तैनात किया जाना था। दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा संभालने वाली CISF ने भी अपने दिल्ली यूनिट के कर्मियों की छुट्टियों पर पाबंदियां लगाई हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस अपने कर्मियों की सामान्य छुट्टियां रद्द कर चुकी है। इन कदमों से साफ है कि प्रशासन आने वाले दिनों में किसी भी बड़े जमावड़े या कानून-व्यवस्था की चुनौती को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान के आरोप पर MEA ने क्या कहा?
CJP आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलकों में विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान की कथित भूमिका के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में जब प्रवक्ता से इन आरोपों पर सवाल पूछा गया तो जवाब था, “इस मुद्दे पर आपके साथ साझा करने के लिए मेरे पास कोई जानकारी नहीं है।” विदेश मंत्रालय का यह जवाब इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन फिलहाल MEA ने ऐसी किसी विदेशी फंडिंग या पाकिस्तान की भूमिका की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में इन आरोपों को आधिकारिक रूप से स्थापित तथ्य के बजाय दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 27 जुलाई को सुनवाई
20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में दाखिल दो याचिकाओं पर 27 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामला रखते हुए आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया और यह स्थिति न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करती है। उन्होंने अदालत से तत्काल दखल की अपील की। चीफ जस्टिस ने मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति देते हुए कहा कि अदालत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। छात्र प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर पहले ही राजनीतिक विवाद तेज है और कुछ घायलों की मेडिकल रिपोर्ट में संदिग्ध गनशॉट तथा ‘पैलेट इंजरी मार्क्स’ का उल्लेख सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। दिल्ली पुलिस ने हालांकि पैलेट या रबर गन के इस्तेमाल से इनकार किया है।
दिल्ली से कोलकाता-मुंबई तक फैला विरोध
NEET विवाद को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं है। शुक्रवार को कोलकाता में वामपंथी छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। मुंबई में भी तिरंगा रैली निकाली गई, जबकि छत्रपति संभाजीनगर में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ से जुड़े वकीलों ने दिल्ली में 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। अलग-अलग शहरों में हो रहे प्रदर्शनों से संकेत मिल रहे हैं कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का रूप ले रहा है।
सरकार से दो घंटे बातचीत, CJP प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी
शुक्रवार को सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत हुई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक के बाद भी CJP केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी प्रमुख मांग पर कायम रही। CJP के मुताबिक, सरकार ने इस मांग पर विचार के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। दूसरी ओर सरकार की तरफ से कहा गया कि आंदोलनकारियों की तीन प्रमुख मांगों और परीक्षा सुधार से जुड़े पांच सुझावों को सुना गया है और आंतरिक विचार-विमर्श के बाद शनिवार को दोबारा बातचीत होगी। हालांकि सरकार की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अभी कोई आश्वासन नहीं दिया गया है।
CJP ने NEET विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने या कानूनी कार्रवाई नहीं करने की मांग भी उठाई है। CJP ने दावा किया है कि इन दोनों मुद्दों पर सरकार सकारात्मक है, जबकि सरकारी पक्ष से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इन मांगों पर अभी चर्चा की जानी है। ऐसे में दोनों पक्षों के बयानों के बीच अंतर बना हुआ है और शनिवार की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, कानून होगा और सख्त
बढ़ते छात्र आंदोलन के बीच केंद्र ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक पर कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्तावित बदलावों में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धांधली के मामलों में अधिक कठोर दंड तथा समयबद्ध सुनवाई की व्यवस्था शामिल किए जाने की बात सामने आई है। संशोधन विधेयक को सोमवार, 27 जुलाई को संसद में विचार के लिए लाए जाने की संभावना है।
इसी क्रम में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में भी बड़ी कार्रवाई की गई है। 47 अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि कुछ मामलों में कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की तैयारी भी है। सरकार इसे NTA के व्यापक पुनर्गठन और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने की कवायद बता रही है। लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासनिक सुधार और कठोर कानून के साथ राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
अब नजर शनिवार की बातचीत पर
शनिवार का दिन इस पूरे टकराव में अहम साबित हो सकता है। एक तरफ सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच दोबारा बातचीत होनी है और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार के जवाब का इंतजार है, दूसरी तरफ राजधानी में अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बल पहुंच रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट भी 27 जुलाई को कथित पुलिस ज्यादती से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच पैदा हुए भरोसे के संकट का राजनीतिक समाधान निकालना। पेपर लीक के खिलाफ कानून सख्त करना और NTA में कार्रवाई सरकार की तरफ से बड़े कदम हैं, लेकिन आंदोलन की दिशा अब इस बात से तय हो सकती है कि जवाबदेही के सवाल और छात्रों की मांगों पर शनिवार की बातचीत में क्या रास्ता निकलता है।




