पर्यटन/ लाइफस्टाइल | श्रेया | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
कभी भारतीय पर्यटकों के लिए यूरोप की छुट्टियां एक बड़े सपने की तरह हुआ करती थीं—पेरिस की गलियां, स्विट्जरलैंड की वादियां, इटली के ऐतिहासिक शहर और स्पेन-ग्रीस के समुद्री तट। लेकिन अब बड़ी संख्या में भारतीय यात्रियों के लिए यूरोप की छुट्टियों की योजना उत्साह से ज्यादा तनाव का कारण बनती जा रही है। भारतीय पासपोर्ट धारकों को यूरोप जाने के लिए वीजा प्रक्रिया, आवेदन से जुड़ी अनिश्चितता, संभावित अस्वीकृति और सीमा पर लंबी कतारों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर यह है कि कुछ भारतीय यात्री अपनी यूरोप यात्रा पर दोबारा विचार कर रहे हैं और ऐसे देशों की तरफ देख रहे हैं, जहां प्रवेश प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान है।
भारत दुनिया की प्रमुख और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों की संख्या तथा उनकी खर्च करने की क्षमता भी बढ़ी है। इसके बावजूद यूरोप जाने की प्रक्रिया कई यात्रियों के लिए आसान नहीं हुई है। खासकर शेंगेन वीजा के लिए दस्तावेज जुटाने, अपॉइंटमेंट हासिल करने और आवेदन पर फैसले का इंतजार करने की प्रक्रिया यात्रा की योजना को मुश्किल बना सकती है। होटल और फ्लाइट की बुकिंग करने के बावजूद वीजा मिलने की निश्चितता न होना यात्रियों के लिए आर्थिक जोखिम भी पैदा करता है। परिवार के साथ यात्रा करने वालों के मामले में यह परेशानी और बढ़ सकती है, क्योंकि प्रत्येक सदस्य की यात्रा योजना वीजा के फैसले से जुड़ी होती है।
भारतीय यात्रियों की बढ़ती शिकायतों का एक बड़ा कारण यह है कि विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट होने के बावजूद वीजा से जुड़ी लंबी कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। वीजा आवेदन में देरी या अस्वीकृति का असर केवल यात्रा की तारीख पर नहीं पड़ता, बल्कि विमान टिकट, होटल बुकिंग, स्थानीय यात्रा और परिवार के पूरे कार्यक्रम पर पड़ सकता है। कई मामलों में महीनों पहले बनाई गई योजना वीजा के एक फैसले पर निर्भर हो जाती है। ऐसे में छुट्टियां मनाने की तैयारी ही तनावपूर्ण प्रक्रिया में बदल सकती है।
इस बदलाव का दूसरा पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण है। भारतीय पर्यटक के सामने अब यूरोप ही एकमात्र प्रतिष्ठित विदेशी छुट्टी का विकल्प नहीं है। एशिया, पश्चिम एशिया और दुनिया के दूसरे क्षेत्रों के कई पर्यटन स्थल भारतीय बाजार को सक्रिय रूप से आकर्षित कर रहे हैं। आसान प्रवेश व्यवस्था, बेहतर एयर कनेक्टिविटी और भारतीय यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई पर्यटन सेवाएं किसी गंतव्य को ज्यादा आकर्षक बना सकती हैं। ऐसे में छुट्टियां बिताने जा रहा परिवार स्वाभाविक रूप से यह सवाल पूछ सकता है कि यदि समान बजट में किसी दूसरे खूबसूरत देश की यात्रा कम कागजी परेशानी और अधिक निश्चितता के साथ संभव है, तो यूरोप के वीजा के लिए लंबी और तनावपूर्ण प्रक्रिया क्यों अपनाई जाए?
यह यूरोप के पर्यटन उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है। भारत अब केवल विशाल आबादी वाला बाजार नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल मार्केट है। भारतीय मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग में विदेशी छुट्टियों का चलन बढ़ रहा है। युवा पेशेवर, परिवार, नवविवाहित जोड़े और संपन्न वरिष्ठ नागरिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। ऐसे यात्रियों के लिए किसी देश की खूबसूरती जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण यात्रा की सुविधा भी होती जा रही है। यदि वीजा प्रक्रिया ही यात्रा का सबसे तनावपूर्ण हिस्सा बन जाए तो पर्यटक अपना पैसा ऐसे गंतव्य पर खर्च करना पसंद कर सकता है, जहां उसका स्वागत ज्यादा सहज तरीके से हो।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भारतीय पर्यटकों ने बड़े पैमाने पर यूरोप जाना बंद कर दिया है। पेरिस, रोम, स्विट्जरलैंड, एम्स्टर्डम, बार्सिलोना और दूसरे यूरोपीय गंतव्यों का आकर्षण बरकरार है। बदलाव यह है कि भारतीय यात्रियों के पास अब विकल्प अधिक हैं और इसलिए वे कठिन वीजा प्रक्रिया को पहले की तरह यात्रा की अनिवार्य कीमत मानने के लिए तैयार नहीं हैं। पर्यटन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ सुविधा स्वयं एक महत्वपूर्ण पर्यटन उत्पाद बन चुकी है।
आने वाले वर्षों में वैश्विक पर्यटन की लड़ाई केवल इस बात पर नहीं होगी कि किस देश के पास बेहतर समुद्र तट, पहाड़, संग्रहालय या ऐतिहासिक शहर हैं। मुकाबला इस बात पर भी होगा कि कौन सा देश पर्यटक के लिए अपने दरवाजे सबसे सरल, निश्चित और सम्मानजनक तरीके से खोलता है। भारतीय यात्रियों की बढ़ती आर्थिक ताकत के बीच यूरोप के लिए संदेश साफ है—उसका आकर्षण अब भी जबरदस्त है, लेकिन भारतीय पर्यटक के सामने अब दुनिया भर के विकल्प मौजूद हैं।




