स्वास्थ्य/ व्यापार | अखलाक अहमद उस्मानी | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
भारत की पहचान दुनिया में अब केवल पर्यटन, संस्कृति, योग और आयुर्वेद तक सीमित नहीं रह गई है। इलाज के लिए भी बड़ी संख्या में विदेशी मरीज भारत का रुख कर रहे हैं। कोई वडोदरा में हिप रिप्लेसमेंट करा रहा है, कोई चेन्नई में दांतों का इलाज, कोई दिल्ली में IVF तो कोई कैंसर, हृदय रोग या न्यूरोलॉजी से जुड़ी जटिल चिकित्सा के लिए भारतीय अस्पतालों को चुन रहा है। खास बात यह है कि इसके पीछे अब केवल कम खर्च वजह नहीं है। बेहतर डॉक्टर, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, कम प्रतीक्षा अवधि, अंग्रेजी बोलने वाला मेडिकल स्टाफ, विशेषज्ञ डॉक्टरों तक आसान पहुंच और कई देशों की तुलना में इलाज की अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया भारत को तेजी से एक बड़े Medical Value Travel केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 और सरकारी अनुमानों के अनुसार भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2025 के करीब 8.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 16.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वैश्विक स्तर पर भी मेडिकल वैल्यू ट्रैवल का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसके 2022 के 115.6 अरब डॉलर से 2030 तक करीब 286.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान बताया गया है। भारत का अस्पताल और हेल्थकेयर डिलीवरी बाजार भी सालाना करीब 10-12 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए वित्त वर्ष 2030 तक लगभग ₹12 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच सकता है। निजी अस्पताल श्रृंखलाओं की क्षमता भी लगभग 70,000 बेड से बढ़कर 2030 तक एक लाख आठ हजार से अधिक होने का अनुमान है। Medical Tourism Index 2020-21 में भारत दुनिया के 46 मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन में दसवें स्थान पर था।
भारत आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या इस बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2025 में 5,07,244 विदेशी नागरिक चिकित्सा उपचार के लिए भारत आए, जो उस वर्ष भारत आए कुल विदेशी पर्यटकों का करीब 5.5 प्रतिशत था। तुलना करें तो 2009 में यह संख्या लगभग 1.12 लाख थी। सबसे ज्यादा 3,25,127 मरीज बांग्लादेश से आए। इसके बाद इराक से 30,989, उज्बेकिस्तान से 13,699, सोमालिया से 11,506, तुर्कमेनिस्तान से 10,231, ओमान से 9,738 और केन्या से 9,357 मेडिकल यात्री भारत पहुंचे। भारत में कार्डियक सर्जरी, जॉइंट रिप्लेसमेंट, कैंसर उपचार, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, डेंटल केयर, कॉस्मेटिक सर्जरी और न्यूरोलॉजिकल उपचार जैसे क्षेत्रों में विदेशी मरीजों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
इस बढ़ते क्षेत्र को सरकार भी आर्थिक और स्वास्थ्य सेवा के बड़े अवसर के रूप में देख रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 में राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से पांच Regional Medical Hubs विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें चिकित्सा सुविधाओं के साथ शिक्षा, रिसर्च, AYUSH केंद्र और Medical Value Tourism facilitation centres शामिल किए जाने की योजना है। विदेशी मरीजों के लिए भारत ने e-Medical Visa और e-Medical Attendant Visa की सुविधा 172 देशों के नागरिकों तक विस्तारित की है। पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के लिए e-AYUSH Visa श्रेणियां भी उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ‘Heal in India’ प्लेटफॉर्म को अस्पताल खोजने से लेकर उपचार की योजना, बुकिंग, भुगतान और ऑपरेशन के बाद की देखभाल तक एकीकृत व्यवस्था बनाने की दिशा में विकसित किया जा रहा है।
भारत के विशाल हेल्थकेयर नेटवर्क को भी इस संभावना की बड़ी ताकत माना जा रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 69,364 अस्पताल हैं, जिनमें 43,486 निजी और 25,778 सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान शामिल बताए गए हैं। देश में करीब 12 लाख पंजीकृत डॉक्टर हैं और 2026 तक 1,299 से अधिक अस्पताल NABH से मान्यता प्राप्त बताए गए हैं। कई भारतीय अस्पतालों के पास अंतरराष्ट्रीय JCI accreditation भी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे महानगर विदेशी मरीजों के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वडोदरा, लखनऊ और दूसरे टियर-2 शहरों में भी कम खर्च में उच्च स्तर की चिकित्सा उपलब्ध होने के कारण भविष्य में मेडिकल टूरिज्म का दायरा महानगरों से आगे बढ़ सकता है।
विदेशी मरीजों के अनुभव बताते हैं कि भारत की ताकत केवल कीमत में नहीं है। अमेरिका के Charlie Evans ने ऋषिकेश में इलाज के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्हें अंग्रेजी बोलने वाला स्टाफ मिला, लगभग इंतजार नहीं करना पड़ा और चिकित्सा उपकरण भी अमेरिकी अस्पतालों में देखी गई सुविधाओं के तुलनीय लगे। उनके मुताबिक परामर्श, दवा और उपचार मिलाकर खर्च लगभग 10 से 20 डॉलर आया, जबकि अमेरिका में ऐसी ही चिकित्सा पर करीब 150 डॉलर खर्च हो सकते थे। भारत में रहने वाली अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर Kristen Fischer ने भी भारतीय हेल्थकेयर को “simple, affordable, fast” बताते हुए कहा कि यहां इलाज का खर्च पहले स्पष्ट हो जाना मरीज के लिए बड़ी सुविधा है। उन्होंने डॉक्टर तक उसी दिन पहुंच और अपेक्षाकृत तेज उपचार को भी भारतीय व्यवस्था की खासियत बताया।
यूरोप के मरीजों के अनुभव भी लागत के अंतर को दिखाते हैं। नीदरलैंड के Utrecht में रहने वाली Sej के मुताबिक वहां करीब 30 मिनट की दांतों की सफाई पर लगभग 185 यूरो खर्च होते हैं, जबकि लखनऊ में उसी तरह की प्रक्रिया करीब ₹3,000 में हो जाती है। ब्रिटेन की Jenny Mowbray ने कोच्चि में रहते हुए न्यूरोलॉजिकल परामर्श और जांच कराई। उनके अनुसार भारत में विशेषज्ञ डॉक्टर से एक दिन के भीतर परामर्श, MRI और ब्लड टेस्ट जैसी जांच तेजी से हो सकीं और परिणाम भी जल्द मिल गए। उनके लिए भारत की सबसे बड़ी खूबियां इलाज तक पहुंच, गति, गुणवत्ता, लागत और विकल्प थीं। ब्रिटेन के Reuben Charles ने गुवाहाटी में घर पर ब्लड टेस्ट की सेवा लेने के बाद भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की सुविधा और पेशेवर व्यवहार की प्रशंसा की।
लेकिन भारत के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर भारत को अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और दूसरे विकसित बाजारों से ज्यादा मरीज आकर्षित करने हैं तो केवल कम कीमत पर्याप्त नहीं होगी। विदेशी मरीज के लिए यात्रा की शुरुआत से इलाज के बाद घर लौटने तक पूरी प्रक्रिया आसान बनानी होगी। मेडिकल वीजा की प्रक्रिया को सरल करना, अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त अस्पतालों की संख्या बढ़ाना, अस्पताल और एयरपोर्ट के बीच बेहतर समन्वय, अलग-अलग भाषाओं में सहायता, इलाज की लागत की पारदर्शिता और अस्पतालों के clinical outcomes की विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी होगा। कुछ अस्पताल प्रबंधकों ने मौजूदा मेडिकल वीजा पोर्टल को जटिल बताते हुए इसमें सुधार की जरूरत भी जताई है।
अगली चुनौती भरोसे की है। कोई विदेशी मरीज केवल यह जानकर हजारों किलोमीटर की यात्रा नहीं करेगा कि भारत में ऑपरेशन सस्ता है। वह यह भी जानना चाहेगा कि जिस अस्पताल को वह चुन रहा है उसकी गुणवत्ता क्या है, डॉक्टर का अनुभव कितना है, इलाज की सफलता का रिकॉर्ड कैसा है, अनुमानित खर्च कितना होगा और अपने देश वापस जाने के बाद कोई समस्या आने पर फॉलो-अप कैसे होगा। इसी कारण अस्पताल अब pre-arrival teleconsultation, मेडिकल वीजा सहायता, पहले से उपचार और खर्च का अनुमान, एयरपोर्ट ट्रांसफर, रहने की व्यवस्था, भाषा अनुवाद, मरीज की संस्कृति के अनुरूप भोजन और इलाज के बाद ऑनलाइन फॉलो-अप जैसी सेवाओं पर जोर दे रहे हैं।
भारत के पास मेडिकल टूरिज्म की वैश्विक शक्ति बनने के लिए जरूरी बुनियादी आधार मौजूद है—विशाल अस्पताल नेटवर्क, बड़ी संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर, आधुनिक चिकित्सा तकनीक, अंग्रेजी भाषा में संवाद की सुविधा और पश्चिमी देशों के मुकाबले कई उपचारों की कम लागत। लेकिन अगली छलांग अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर से नहीं, बल्कि पूरे patient experience को बेहतर बनाने से आएगी। सरकार, अस्पताल, एयरलाइंस, होटल, बीमा कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म यदि मिलकर विदेशी मरीज के लिए एक सहज और भरोसेमंद व्यवस्था बना सकें तो भारत के लिए मेडिकल टूरिज्म केवल अरबों डॉलर का बाजार नहीं, बल्कि दुनिया में भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बन सकता है।




