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20 जुलाई की हिंसा में शामिल एक-एक पुलिसकर्मी की पहचान कर दर्ज कराएंगे शिकायत: CJP

राष्ट्रीय | हनुमान मिश्रा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 जुलाई 2026

जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने शुक्रवार को कहा कि प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की जाएगी।

सौरव दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि CJP इसके लिए एक वेबसाइट शुरू करने जा रही है। संगठन प्रदर्शनकारियों से तस्वीरें और वीडियो साझा करने की अपील करेगा, ताकि उन पुलिसकर्मियों की पहचान की जा सके जिन पर 20 जुलाई को जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप है।

दास ने कहा, “हम एक-एक पुलिसकर्मी की पहचान करेंगे, जिसने प्रदर्शनकारियों को चोट पहुंचाई। उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने की कोशिश करेंगे। अगर दिल्ली पुलिस FIR दर्ज नहीं करती है तो हम अदालत जाएंगे।” उन्होंने दावा किया कि देशभर के कई वकील इस मामले में प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने के लिए आगे आए हैं।

CJP ने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी दोहराई है। संगठन के संस्थापक अभिजीत डिपके का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए।

इस बीच प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने का विवाद भी बढ़ता जा रहा है। CRPF ने कहा है कि वह पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों की सत्यता की जांच कर रहा है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से पहले ही इनकार कर चुकी है। ऐसे में इस मामले की आधिकारिक तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है।

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CJP और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अहम बातचीत भी होनी है। संगठन ने साफ किया है कि वार्ता के बावजूद उसकी मुख्य मांगों में कोई बदलाव नहीं आया है। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी और पेपर लीक से प्रभावित परिवारों के लिए राहत शामिल है।

CJP का कहना है कि मांगें पूरी होने तक जंतर-मंतर पर उसका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में सरकार के साथ बातचीत के साथ अब 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई और उसके लिए जवाबदेही तय करने का मुद्दा भी आंदोलन के केंद्र में आ गया है।

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