राष्ट्रीय | काव्या अग्रवाल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 जुलाई 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान घायल हुए 19 वर्षीय छात्र साहिल लोछाब इस समय एम्स ट्रॉमा सेंटर के अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी दाहिनी आंख पर मोटी सफेद पट्टी बंधी है और चेहरे के दाहिने हिस्से पर कई काले निशान साफ दिखाई देते हैं। सबसे बड़ा दर्द यह है कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया है कि उनकी आंख की रोशनी वापस आने की संभावना अब केवल 1 प्रतिशत रह गई है।
साहिल का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उन पर पैलेट (धातु के छोटे छर्रे) दागे गए, जिनमें से एक उनकी दाहिनी आंख में जा धंसा। गंभीर हालत में उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जहां मंगलवार को उनकी आंख का ऑपरेशन किया गया। इसके बावजूद आंख के अंदर अभी भी कुछ छर्रे फंसे हुए हैं और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
अस्पताल के बिस्तर पर लेटे साहिल ने बेहद भावुक स्वर में कहा, “डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मेरी आंख की रोशनी वापस आने की सिर्फ एक प्रतिशत उम्मीद है। यह सुनकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मैं अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ना चाहता, लेकिन डर भी लग रहा है कि शायद मैं अपनी एक आंख से कभी देख नहीं पाऊंगा।”
महज 19 साल की उम्र में यह हादसा साहिल और उनके परिवार के लिए गहरा सदमा बन गया है। परिवार के लोग अस्पताल में उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं, जबकि डॉक्टर उनकी आंख बचाने की हरसंभव कोशिश में जुटे हैं।
यह घटना Cockroach Janta Party (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई। CJP का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया, जबकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई थी।
फिलहाल साहिल के पैलेट लगने के दावे की पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, उनकी चोटों और इलाज ने आंदोलन के दौरान बल प्रयोग को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच साहिल की कहानी अब सिर्फ एक घायल छात्र की नहीं रह गई है, बल्कि उन हजारों युवाओं की चिंता और पीड़ा का प्रतीक बन गई है, जो अपने भविष्य और न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। उनकी एक बात आज भी हर किसी को झकझोर रही है—”क्या मुझे फिर कभी अपनी आंखों से दुनिया देखने का मौका मिलेगा?”




