अंतरराष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026
भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि दोनों देशों के बीच स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध केवल पारस्परिक सम्मान, साझा हितों और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के सम्मान के आधार पर ही विकसित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के मजबूत रिश्ते “बहुध्रुवीय एशिया” और “बहुध्रुवीय विश्व” के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात के दौरान जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सामान्य संबंधों की सबसे पहली और अनिवार्य शर्त सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता है।
जयशंकर ने कहा, “हमारा मानना है कि स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक हित और पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर ही विकसित हो सकते हैं। ऐसे संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। लेकिन सामान्य संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता पूर्व शर्त है।”
इस बैठक से पहले भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने क्वाड (Quad) की बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता, कानून आधारित व्यवस्था और निर्बाध समुद्री आवागमन के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
मनीला में ही जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले काला सागर (ब्लैक सी) में रूसी हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। विदेश मंत्री ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा रूसी पक्ष के समक्ष मजबूती से उठाया।
सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत और चीन के संबंध वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद तनावपूर्ण हो गए थे। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है। ऐसे में मनीला में जयशंकर और वांग यी की मुलाकात को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल माना जा रहा है।
भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि सीमा पर शांति और विश्वास बहाली के बिना द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह सामान्य नहीं माना जा सकता। वहीं क्वाड और रूस के साथ समानांतर बैठकों ने यह भी संकेत दिया कि भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए विभिन्न वैश्विक साझेदारों के साथ संवाद को समान महत्व दे रहा है।




