राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 जुलाई 2026
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामलों में मिली जमानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि छह वर्षों से जमानत पर चल रहे व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में इस चरण पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें झारखंड हाईकोर्ट द्वारा लालू यादव की सजा निलंबित करने और जमानत देने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की मांग को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि इतने लंबे समय बाद लालू यादव की जमानत रद्द करना उचित नहीं होगा। हालांकि अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि लालू यादव की सजा के खिलाफ लंबित आपराधिक अपीलों का निस्तारण अधिमानतः छह महीने के भीतर किया जाए।
सीबीआई ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट ने चारा घोटाला मामलों में दोषसिद्धि के बाद लालू यादव की सजा निलंबित कर जमानत देने में त्रुटि की है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चूंकि वह पिछले छह वर्षों से जमानत पर हैं, इसलिए उनकी स्वतंत्रता में अब हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
गौरतलब है कि चारा घोटाला देश के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। इस मामले में सरकारी खजाने से फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का आरोप है। लालू प्रसाद यादव को विभिन्न मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है, जिसके बाद झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद लालू यादव की जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी, जबकि मामले से जुड़ी लंबित अपीलों पर अंतिम फैसला अब झारखंड हाईकोर्ट करेगा।




