Home » National » E20 विवाद: चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर FIR, नागपुर साइबर पुलिस ने दर्ज किया मामला

E20 विवाद: चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर FIR, नागपुर साइबर पुलिस ने दर्ज किया मामला

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नागपुर/नई दिल्ली | 14 जुलाई 2026

केंद्र सरकार की E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर देशभर में चल रही बहस अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गई है। नागपुर साइबर पुलिस ने चार चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स—मनीष कश्यप, देसी बॉयसर (Desi Boyser), हर्षित राठी और अंकलेश इनवाते—के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई भाजपा के नागपुर सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के प्रमुख शिशिर त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर की गई है। मामले ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सरकार की नीतियों की आलोचना और गलत सूचना फैलाने के आरोपों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, इन इन्फ्लुएंसर्स ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर ऐसे वीडियो प्रकाशित किए, जिनमें केंद्र सरकार की E20 नीति और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के बयानों को लेकर कथित रूप से भ्रामक और गलत दावे किए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन वीडियो में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई और सरकार की इथेनॉल नीति के बारे में गलत संदेश गया।

नागपुर साइबर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच की और उसके आधार पर चारों इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और वीडियो की सामग्री, उससे जुड़े तथ्यों तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस चल रही है। कई यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया गया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से पुराने वाहनों के इंजन, माइलेज और प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कुछ वीडियो में यह भी कहा गया कि इससे लाखों पुराने वाहन प्रभावित हो सकते हैं। इन दावों को लेकर वाहन मालिकों के बीच भी चिंता देखने को मिली।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार इन आशंकाओं को लगातार खारिज करती रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि E20 नीति व्यापक तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर लागू की गई है। उनका कहना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से न केवल पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। सरकार का यह भी दावा है कि सोशल मीडिया पर E20 को लेकर कई भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही हैं, जिनका वैज्ञानिक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।

हालांकि, दूसरी तरफ कुछ ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और वाहन मालिकों का कहना है कि पुराने मॉडल के वाहनों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। उनका मानना है कि सभी वाहनों की तकनीकी क्षमता एक जैसी नहीं होती और इसलिए इस विषय पर स्वतंत्र परीक्षणों तथा स्पष्ट जानकारी की आवश्यकता है। इसी कारण E20 नीति को लेकर सार्वजनिक बहस लगातार जारी है।

इसी बीच चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर ने इस विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे गलत सूचना फैलाने के खिलाफ जरूरी कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि सरकारी नीतियों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी भी कार्रवाई में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा कानून के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

यह मामला पूरी तरह जांच के अधीन है। पुलिस ने किसी भी आरोपी को दोषी घोषित नहीं किया है और न ही अदालत की ओर से इस मामले में कोई निर्णय आया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाएंगी कि संबंधित वीडियो में किए गए दावे तथ्यात्मक रूप से सही थे या भ्रामक। इसके बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

E20 नीति को लेकर देश में बहस अभी भी जारी है। एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हित से जोड़कर देख रही है, तो दूसरी ओर इसके तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह मामला केवल चार इन्फ्लुएंसर्स पर दर्ज एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा है कि डिजिटल युग में सरकारी नीतियों पर होने वाली सार्वजनिक बहस और गलत सूचना के आरोपों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted