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एनसीपी में कोई फूट नहीं, सच्चिदानंद सिंह के पत्र का कोई महत्व नहीं: प्रफुल्ल पटेल

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 14 जुलाई 2026

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भीतर नेतृत्व को लेकर उठे विवाद के बीच पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने सभी अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि संगठन में किसी प्रकार की फूट नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह द्वारा लिखा गया पत्र कोई महत्व नहीं रखता और इससे न तो पार्टी की वैधता पर कोई असर पड़ता है और न ही संगठनात्मक ढांचे पर।

प्रफुल्ल पटेल ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि एनसीपी पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के भीतर किसी भी तरह का संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पदाधिकारी या कार्यकर्ता को संगठनात्मक प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति है तो उसे पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाया जाना चाहिए। किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, क्योंकि पार्टी का हित सर्वोपरि है।

उन्होंने कहा, “सच्चिदानंद सिंह के पत्र का कोई महत्व नहीं है। पार्टी में कोई विभाजन नहीं है। यदि किसी को कोई मुद्दा उठाना है तो उसे संगठन के भीतर उठाना चाहिए। सभी मामलों का समाधान आपसी संवाद से किया जाना चाहिए।”

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद उस समय सामने आया जब एनसीपी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने पार्टी नेतृत्व को चुनौती देते हुए दावा किया कि 26 फरवरी 2026 को हुई संगठनात्मक बैठक में सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया संविधान और पार्टी के नियमों के अनुरूप नहीं थी।

सच्चिदानंद सिंह का आरोप है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने इसे “असंवैधानिक”, “शून्य” और “अमान्य” बताते हुए इस पूरी प्रक्रिया को निरस्त किए जाने की मांग की है।

इसी सिलसिले में उनके प्रतिनिधित्व में दिल्ली स्थित एक विधि फर्म ने 9 जुलाई 2026 को पार्टी नेतृत्व को कानूनी नोटिस भी भेजा। नोटिस में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संगठनात्मक निर्णयों की वैधता को चुनौती दी गई है। नोटिस सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या एनसीपी के भीतर एक नया संगठनात्मक विवाद खड़ा हो गया है।

प्रफुल्ल पटेल ने किया खारिज

हालांकि, प्रफुल्ल पटेल ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति द्वारा लिखे गए पत्र या भेजे गए कानूनी नोटिस से पार्टी की स्थिति नहीं बदल जाती। एनसीपी का संगठन मजबूत है और सभी निर्णय पार्टी की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था मौजूद है और यदि किसी को कोई शिकायत है तो उसके समाधान के लिए संगठन के भीतर पर्याप्त मंच उपलब्ध हैं। सार्वजनिक रूप से विवाद खड़ा करने या कानूनी नोटिस भेजने से संगठन को नुकसान पहुंचता है, इसलिए सभी नेताओं को पार्टी हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सुनेत्रा पवार के चुनाव पर सवाल

सच्चिदानंद सिंह के आरोपों का केंद्र सुनेत्रा पवार का अध्यक्ष चुना जाना है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं थी। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अब तक इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और प्रफुल्ल पटेल के बयान से भी यही संकेत मिला है कि शीर्ष नेतृत्व इस विवाद को गंभीर संगठनात्मक संकट के रूप में नहीं देख रहा।

संगठनात्मक एकता पर जोर

प्रफुल्ल पटेल ने दोहराया कि एनसीपी एकजुट है और पार्टी अपने राजनीतिक कार्यक्रमों तथा संगठन विस्तार पर पूरी मजबूती से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेदों को संगठन की एकता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल में अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका समाधान पार्टी के संविधान और आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर आगे बढ़ना है। यदि किसी को कोई शिकायत या सुझाव है तो उस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन सार्वजनिक विवाद पार्टी के हित में नहीं हैं।

आगे क्या?

सच्चिदानंद सिंह की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस पर औपचारिक जवाब देता है या नहीं। फिलहाल प्रफुल्ल पटेल के बयान से साफ है कि शीर्ष नेतृत्व इस पूरे विवाद को कोई बड़ा संगठनात्मक संकट नहीं मान रहा और उसे केवल एक व्यक्तिगत आपत्ति के रूप में देख रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यदि यह मामला पार्टी के आंतरिक मंच तक सीमित रहता है तो विवाद शांत हो सकता है। लेकिन यदि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो संगठनात्मक चुनाव और पार्टी संविधान की व्याख्या को लेकर यह मामला आगे भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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