राष्ट्रीय/ उत्तराखंड | ABC NATIONAL NEWS | देहरादून | 9 जुलाई 2026
उत्तराखंड की धामी सरकार की बहुचर्चित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 एक बार फिर चर्चा में है। न्यूज़लॉन्ड्री की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार ने जिस निवेश मॉडल को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया था, उसकी ग्राउंडिंग सूची में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिनका बड़े औद्योगिक निवेश से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लंदन, दुबई समेत कई देशों में रोड शो किए थे। समिट के आयोजन और प्रचार-प्रसार पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बाद राज्य सरकार ने 1,779 एमओयू (MoU) के माध्यम से 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा किया था।
बाद में वर्ष 2025 में सरकार ने कहा कि इनमें से एक लाख करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतर चुका है। लेकिन न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि “ग्राउंडेड इन्वेस्टमेंट” की सूची में कई छोटे कारोबारी भी निवेशक के रूप में दर्ज हैं। इनमें आटा चक्की, खाद-बीज की दुकानें, छोटी क्लीनिक और स्थानीय व्यवसाय शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ लोगों को यह तक जानकारी नहीं थी कि उनके नाम निवेशकों की सूची में दर्ज हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा दर्शाए गए कुल ग्राउंडेड निवेश का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा राज्य और केंद्र की सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियों यूजेवीएनएल (UJVNL) और टीएचडीसी (THDCIL) की परियोजनाओं से जुड़ा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सबसे बड़े आठ निवेश प्रोजेक्ट्स में भी अधिकांश सरकारी उपक्रमों या सरकारी संस्थाओं से संबंधित थे।
खोजी रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि कई निजी कंपनियों के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपये के निवेश दिखाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई परियोजनाएं या तो शुरू नहीं हुईं, कुछ रद्द हो गईं और कुछ में घोषित निवेश की तुलना में बहुत कम राशि खर्च हुई।
हालांकि, इस पूरे मामले पर उत्तराखंड के उद्योग विभाग ने अपना पक्ष भी रखा है। विभाग का कहना है कि छोटे निवेशकों को सूची में इसलिए शामिल किया गया क्योंकि वे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करते हैं। विभाग ने यह भी कहा कि सरकारी परियोजनाओं तथा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत किए गए निवेश को भी राज्य की निवेश उपलब्धियों का हिस्सा माना गया है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट को धामी सरकार ने उत्तराखंड में औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बताया था। यदि खोजी रिपोर्ट के दावे सही साबित होते हैं तो निवेश के सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता, निवेश नीति की पारदर्शिता और निवेश उपलब्धियों के मूल्यांकन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
फिलहाल इन आरोपों पर उत्तराखंड सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया या किसी स्वतंत्र जांच की घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और सरकार के विस्तृत पक्ष के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।




