अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मेलबर्न | 9 जुलाई 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया की सफल यात्रा के बाद बुधवार शाम ऑस्ट्रेलिया पहुंच गए। तीन देशों की उनकी यात्रा का यह दूसरा और बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है। मेलबर्न पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊर्जा देगा और उन्हें ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ से व्यापक बातचीत का इंतजार है। लेकिन इस बार यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में दो बड़े मुद्दे हैं—भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया से व्यावसायिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता और समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने की रणनीति।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 2014 में हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को अब व्यावसायिक रूप दिया जा सकता है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो ऑस्ट्रेलिया भारत को नियमित रूप से यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। यह भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार रखने वाला देश है। वैश्विक यूरेनियम भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के पास है, लेकिन अब तक उसने भारत को केवल एक बार, वर्ष 2017 में यूरेनियम की खेप भेजी थी। लंबे समय से लंबित यह व्यावसायिक समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत ने हाल ही में SHANTI Act लागू किया है, जिसके जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाना है। इसके लिए न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 18 नए परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से स्थायी यूरेनियम आपूर्ति भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के लिए बेहद अहम होगी।
दौरे का दूसरा बड़ा एजेंडा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना है। दोनों देश एक नए संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप की घोषणा कर सकते हैं। इसके तहत समुद्री निगरानी, समुद्री गतिविधियों की साझा जानकारी, हिंद महासागर में सहयोग और रक्षा समन्वय को और व्यापक बनाया जाएगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया पहले से ही क्वाड (Quad) समूह के सदस्य हैं, जिसमें अमेरिका और जापान भी शामिल हैं। बदलते भू-राजनीतिक माहौल, चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देश अपने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। वर्ष 2021 में दोनों देशों के बीच म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट हुआ था, जिससे दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग कर सकती हैं। अब इस सहयोग को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान इंडिया-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को भी संबोधित करेंगे। दोनों देश अंतरिम व्यापार समझौते को व्यापक कम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट (CECA) में बदलने के लिए बातचीत कर रहे हैं। वर्ष 2022 में आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते के बाद भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ चुका है। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 24.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
प्रधानमंत्री मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे, जहां ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ भी मौजूद रहेंगे। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की संख्या अब लगभग 10 लाख हो चुकी है और यह समुदाय दोनों देशों के रिश्तों का मजबूत आधार बन चुका है।
इस दौरे से क्या बदलाव की उम्मीद?
यदि यूरेनियम समझौता अंतिम रूप लेता है तो भारत की परमाणु ऊर्जा योजनाओं को नई गति मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग मजबूत होने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार समझौते के विस्तार से निवेश, रोजगार और द्विपक्षीय व्यापार को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
चुनौतियां क्या हैं?
हालांकि कई बड़े समझौतों की संभावना है, लेकिन परमाणु ईंधन की आपूर्ति, सुरक्षा मानकों, व्यापारिक शर्तों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा और चीन की सक्रियता भी भारत-ऑस्ट्रेलिया सहयोग की परीक्षा ले सकती है। इसके बावजूद माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को एक नए और अधिक मजबूत दौर में ले जाने वाला साबित हो सकता है।




