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बाढ़ पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: जब जमीन पर कब्जा करते हैं, तब कोई कानून नहीं पढ़ता; यह हमारी अपनी बनाई हुई आपदा है

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 7 जुलाई 2026

मुंबई में हर साल होने वाले जलभराव और बाढ़ की समस्या पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि शहर में बाढ़ किसी प्राकृतिक आपदा से अधिक मानव निर्मित संकट बन चुकी है। अदालत ने कहा कि “जब लोग जमीन पर कब्जा करते हैं, तब कोई कानून नहीं पढ़ता। मुंबई की बाढ़ हमारी अपनी बनाई हुई है।”

हाईकोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों, नालों, मैंग्रोव क्षेत्रों और तटीय इलाकों पर लगातार अतिक्रमण तथा अनियोजित निर्माण के कारण हर साल भारी बारिश के दौरान शहर जलमग्न हो जाता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि कानूनों और पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जाता, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित सरकारी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन से भी सवाल किए कि आखिर बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए प्रभावी और दीर्घकालिक उपाय क्यों नहीं किए जा रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मुंबई में हाल के दिनों में हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और जनजीवन प्रभावित होने की घटनाएं सामने आई हैं। इसी संदर्भ में अदालत ने यह टिप्पणी की कि शहर की वर्तमान स्थिति केवल बारिश का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की अव्यवस्थित शहरी योजना और अतिक्रमण का नतीजा है।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को मुंबई के शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश माना जा रहा है। अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संकेत दिया कि यदि निर्माण गतिविधियों और भूमि उपयोग संबंधी कानूनों का सख्ती से पालन नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी आपदाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।

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