राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जुलाई 2026
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद केंद्र सरकार, ट्रस्ट और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि इन इस्तीफों को स्वीकार करना इस बात का संकेत है कि पिछले एक महीने से सामने आ रहे कथित “चंदा चोरी” के आरोपों को ट्रस्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर लिया है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में पवन खेड़ा ने कहा कि यह स्वागतयोग्य है कि जिन लोगों पर वर्षों तक राम मंदिर को लूटने के आरोप लगते रहे, उन्हें अब ट्रस्ट से हटाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफे स्वीकार कर लेना पर्याप्त नहीं है।
खेड़ा ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोषाध्यक्ष का दायित्व ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और संपत्तियों की सुरक्षा करना होता है। ऐसे में वे अपनी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकते और न ही ट्रस्ट का कोई अन्य सदस्य इस जवाबदेही से बच सकता है।
कांग्रेस नेता ने नए महासचिव की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस के पूर्व उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया है, जबकि उन पर कथित तौर पर इस पूरे मामले को दबाने में भूमिका निभाने के आरोप लगते रहे हैं। खेड़ा का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को बड़ी जिम्मेदारी देने के बजाय ट्रस्ट से बाहर किया जाना चाहिए था।
पवन खेड़ा ने मांग की कि केवल कुछ इस्तीफों से मामला समाप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए और ट्रस्ट के सभी सदस्यों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रस्ट के गठन और उसके सदस्यों की नियुक्ति से जुड़े निर्णयों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके अनुसार, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सके।
फिलहाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट या केंद्र सरकार की ओर से पवन खेड़ा के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच जारी है और इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।




