राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जुलाई 2026
भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत के 125वें स्थान पर पहुंचने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार जिस मजबूत वैश्विक छवि और सम्मान का दावा करती है, ताजा रैंकिंग ने उसकी हवा निकाल कर रख दी है।
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि हाल ही में नई दिल्ली में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा था कि भारत की विदेश नीति ने देश को “विश्व बंधु” के रूप में स्थापित किया है और भारतीय पासपोर्ट को दुनिया भर में सम्मान और विश्वास की नजर से देखा जाता है।
खेड़ा ने कहा कि वास्तविकता इससे अलग तस्वीर पेश करती है। उनके अनुसार ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत 2025 के 124वें स्थान से फिसलकर 125वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय पासपोर्ट धारकों को केवल 26 देशों में वीज़ा-फ्री प्रवेश मिलता है, जबकि विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर यह संख्या 27 बताई गई है। उनके मुताबिक भारत इस सूची में फिलीपींस, मोरक्को, उज्बेकिस्तान और नामीबिया जैसे देशों से भी पीछे है।
कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 23 जुलाई 2025 को पार्टी समर्थकों ने दावा किया था कि भारतीय पासपोर्ट से 59 देशों में वीज़ा-फ्री यात्रा की जा सकती है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि यह दावा कभी सही नहीं था और जनता को गुमराह करने के लिए किया गया था।
उन्होंने कहा कि यदि भारतीय पासपोर्ट की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है, तो सरकार को अपनी विदेश नीति की उपलब्धियों के दावों पर आत्ममंथन करना चाहिए। उनके अनुसार केवल बड़े-बड़े दावे करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी देश की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।
हालांकि, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी उल्लेखनीय है कि दुनिया में विभिन्न संस्थाएं अलग-अलग मानदंडों के आधार पर पासपोर्ट रैंकिंग जारी करती हैं, इसलिए अलग-अलग सूचकांकों में किसी देश की रैंकिंग और वीज़ा-फ्री देशों की संख्या अलग हो सकती है।
फिलहाल भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग और उस पर उठे राजनीतिक सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन गए हैं। विपक्ष इसे सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाने का आधार बना रहा है, जबकि सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।



