राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जुलाई 2026
अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े मामले में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice – DoJ) द्वारा अदालत में दाखिल एक दस्तावेज़ में यह दलील दिए जाने के बाद कि इस मामले को आगे बढ़ाने से भारत के साथ “कूटनीतिक तनाव” (diplomatic strife) पैदा हो सकता है, कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से कहा कि यह मामला विदेशी नागरिकों और भारत में कथित गतिविधियों से जुड़ा है। विभाग ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में भारत ने अपनी जांच में कोई कार्रवाई योग्य अनियमितता नहीं पाई है। साथ ही, सबूतों और प्रमुख गवाहों का भारत में होना तथा आरोपियों के अमेरिका में पेश न होने की संभावना को भी मुकदमा वापस लेने के कारणों में शामिल किया गया।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यदि अमेरिकी न्याय विभाग “कूटनीतिक तनाव” की बात कर रहा है, तो इसका अर्थ है कि मामले को आगे बढ़ाने पर भारत सरकार नाराज़ होती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार अडानी के हितों की रक्षा कर रही है।
हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेज़ में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि भारत सरकार ने मामले को वापस लेने का अनुरोध किया था या किसी प्रकार का दबाव बनाया था। विभाग ने अपने कानूनी तर्कों में संभावित कूटनीतिक प्रभाव, अधिकार क्षेत्र, उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन संबंधी व्यावहारिक चुनौतियों का उल्लेख किया है।
इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष जहां इसे सरकार और उद्योगपति के रिश्तों से जोड़कर देख रहा है, वहीं सरकार की ओर से इस विशेष टिप्पणी पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। विपक्ष के आरोप अपनी जगह हैं, जबकि अमेरिकी न्याय विभाग की दलीलें अदालत के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं। इन दोनों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है।



