राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 जुलाई 2026
पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाई गई आपातकालीन पाबंदियों को वापस ले लिया है। सरकार का कहना है कि युद्धविराम लागू होने, बातचीत शुरू होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आवाजाही दोबारा सामान्य होने के बाद अब आपूर्ति संकट का खतरा काफी कम हो गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस संबंध में नया आदेश जारी करते हुए पहले लागू किए गए कई विशेष प्रावधान हटा दिए हैं। ये पाबंदियां उस समय लगाई गई थीं, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी।
सरकार ने उस दौरान देश में उत्पादित प्राकृतिक गैस और आयातित एलएनजी की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत सरकार ने प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं की सूची बनाकर उसी के अनुसार गैस उपलब्ध कराने का फैसला किया था, ताकि बिजली उत्पादन, उर्वरक और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में गैस की कमी न होने पाए।
अब मंत्रालय का कहना है कि हालात पहले की तुलना में काफी बेहतर हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है और एलएनजी की आपूर्ति भी सामान्य हो रही है। इसी वजह से आपातकालीन नियंत्रण व्यवस्था की अब जरूरत नहीं रह गई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ता है।
सरकार के इस फैसले से गैस की आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। साथ ही उद्योगों और गैस पर निर्भर अन्य क्षेत्रों को भी राहत मिलने की संभावना है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और हॉर्मुज मार्ग सुचारु रूप से चलता रहता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर तत्काल किसी बड़े संकट की आशंका नहीं रहेगी।




