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WATCH VIDEO — ‘गरीब राष्ट्रों को सपने देखने से मत रोकिए’ : ब्रिटेन की महारानी को इंदिरा गांधी का जवाब फिर चर्चा में, अंतरिक्ष कार्यक्रम पर दूरदृष्टि का संदेश

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के बीच भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर बातचीत दिखाई गई है। वीडियो में दावा किया गया है कि महारानी एलिजाबेथ ने भारत में गरीबी का हवाला देते हुए पूछा कि जब देश में इतनी गरीबी है, तब अंतरिक्ष कार्यक्रम पर इतना खर्च क्यों किया जा रहा है। इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष विज्ञान को देश के विकास, किसानों, आपदा प्रबंधन और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

वीडियो के अनुसार, इंदिरा गांधी ने कहा कि अंतरिक्ष कार्यक्रम किसी अमीर देश का शौक नहीं, बल्कि विकासशील भारत की आवश्यकता है। उन्होंने समझाया कि अंतरिक्ष तकनीक किसानों तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचाने, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की समय रहते चेतावनी देने, दूर-दराज़ क्षेत्रों तक संचार और शिक्षा पहुंचाने तथा देश को वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम है।

वीडियो में यह संदेश भी प्रमुखता से सामने आता है कि किसी राष्ट्र का भविष्य केवल वर्तमान की आर्थिक चुनौतियों से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से तय होता है कि वह विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक में कितना निवेश करता है। इसमें कहा गया है कि यदि भारत ने केवल गरीबी खत्म होने का इंतजार किया होता, तो आज न उसके पास मजबूत अंतरिक्ष कार्यक्रम होता और न ही वह वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना पाता।

वीडियो में यह भी रेखांकित किया गया है कि गरीबी दूर करना हर सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन विज्ञान और विकास को रोककर गरीबी समाप्त नहीं की जा सकती। “रोटी भी चाहिए और अनुसंधान भी” जैसे संदेश के माध्यम से यह बताया गया है कि आर्थिक विकास और वैज्ञानिक प्रगति एक-दूसरे के पूरक हैं।

आज भारत विश्व के प्रमुख अंतरिक्ष देशों में शामिल है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान, मंगलयान और अनेक उपग्रह अभियानों के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है। मौसम पूर्वानुमान, संचार, कृषि, आपदा प्रबंधन और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ी है।

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