राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | भोपाल | 4 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लिंचिंग मामले में दोषी करार दिए गए कथित गौरक्षकों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद धमकियों का सामना कर रहीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए राज्य पुलिस को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए और कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी को धमकाना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर सीधा हमला है।
सुओ मोटू संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह शामिल थे, ने 1 जुलाई को प्रकाशित समाचारों का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने कहा कि किसी न्यायाधीश को उसके न्यायिक फैसले के कारण धमकियां मिलना अत्यंत गंभीर विषय है और ऐसी घटनाएं न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा न्यायाधीशों के निर्भीक होकर कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं।
लिंचिंग मामले में उम्रकैद के फैसले के बाद मिल रही थीं धमकियां
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने एक बहुचर्चित मॉब लिंचिंग मामले में कई कथित गौरक्षकों को ट्रक चालक की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उन्हें लगातार धमकियां मिलने की खबरें सामने आई थीं। इन घटनाओं ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
राज्य पुलिस को तत्काल सुरक्षा के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि न्यायाधीश तबस्सुम खान की सुरक्षा में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ धमकी और डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को कानून के अनुसार गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में न्यायिक अधिकारियों को धमकियों और सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने की घटनाओं को लेकर न्यायपालिका के भीतर भी चिंता बढ़ी है। इससे पहले भी सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई हो चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह आदेश इस संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि न्यायिक निर्णयों के कारण किसी न्यायाधीश को डराने या दबाव बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी और कानून ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करेगा।




