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राम मंदिर चंदा विवाद पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, PM से जवाब और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा गबन का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक और राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद अब कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ने और जवाब देने की मांग की है।

‘राम मंदिर का श्रेय लिया, अब जवाबदेही भी लें प्रधानमंत्री’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण का राजनीतिक और सार्वजनिक श्रेय लिया था, इसलिए अब कथित चंदा घोटाले और जनता के विश्वास को लगी चोट पर भी उन्हें अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके दान से जुड़े इस मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

SIT जांच पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि जांच की दिशा इस तरह तय की जा रही है जिससे ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाया जा सके और केवल कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई करके पूरे मामले को सीमित कर दिया जाए। कांग्रेस का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष होनी है तो इसकी निगरानी स्वतंत्र एजेंसी या न्यायपालिका के स्तर पर होनी चाहिए।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट भंग करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए और उसके गठन से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन तथा प्रशासनिक फैसलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए। पार्टी का कहना है कि केवल आपराधिक आरोपों की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि ट्रस्ट की पूरी कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता की भी व्यापक समीक्षा होनी चाहिए।

देशभर में बढ़ रहा है विवाद

राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों में लगातार राजनीतिक हलचल तेज हुई है। एक ओर RSS ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए हिंदू समाज से एकजुट रहने की अपील की है, वहीं दूसरी ओर अयोध्या के वकीलों ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने भी 5 जुलाई से ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। अब कांग्रेस के नए हमले के बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक और संवेदनशील बन गया है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जांच पर टिकी निगाहें

राम मंदिर में कथित चंदा गबन का मामला अब केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आस्था, जवाबदेही और राजनीतिक विश्वास का मुद्दा बनता जा रहा है। ऐसे में पूरे देश की निगाहें अब जांच की दिशा, उसकी निष्पक्षता और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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