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₹52,000 करोड़ की मेगा डिफेंस डील: सेना को मिलेंगे कामिकाज़े ड्रोन, मिसाइल और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026

भारत अपनी सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा चुका है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की बैठक में करीब ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को Acceptance of Necessity (AoN) प्रदान की गई है। इन खरीद प्रस्तावों का उद्देश्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को अत्याधुनिक हथियारों और नई पीढ़ी की युद्ध तकनीकों से लैस करना है, ताकि भविष्य के किसी भी सुरक्षा खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

सेना को मिलेंगे अत्याधुनिक हथियारों का बड़ा पैकेज

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इनमें आकाश तरंग एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM), मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM), वी-शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS), टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम और जेट आधारित कामिकाज़े ड्रोन सिस्टम शामिल हैं। ये सभी प्रणालियां आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर चुनी गई हैं।

ड्रोन और मिसाइल हमलों से निपटने की क्षमता होगी और मजबूत

हाल के वर्षों में ड्रोन और मिसाइल आधारित हमले वैश्विक युद्धों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में आकाश तरंग जैसे एंटी-ड्रोन सिस्टम और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और हवाई हमलों को समय रहते निष्क्रिय करने में सक्षम होंगे। वहीं कामिकाज़े ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और प्रभावी हमला करने की क्षमता देंगे, जिससे भारतीय सेना की आक्रामक ताकत भी बढ़ेगी।

नौसेना को मिलेंगे आधुनिक मानव रहित नौसैनिक सिस्टम

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय नौसेना के लिए भी आधुनिक मानवरहित (Unmanned) नौसैनिक प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है। इन अत्याधुनिक प्रणालियों की मदद से समुद्री सीमाओं की निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, खुफिया जानकारी जुटाने और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।

‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन रक्षा खरीद प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को नई गति मिलेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू रक्षा उद्योग के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

तीनों सेनाओं की युद्ध क्षमता में होगा बड़ा इजाफा

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ₹52,000 करोड़ की यह रक्षा खरीद भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त युद्ध क्षमता को नई मजबूती देगी। विशेष रूप से ड्रोन युद्ध, मिसाइल रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और नेटवर्क आधारित सैन्य अभियानों में भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्षम होगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई सैन्य चुनौतियों के बीच यह फैसला भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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