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TTI विदेशी फंडिंग केस में बड़ा एक्शन, ED की जांच CBI को सौंपेगी नए सुराग; ₹92.55 करोड़ के इस्तेमाल पर सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026

विदेशी फंडिंग और उसके कथित अवैध इस्तेमाल से जुड़े The Timothy Initiative (TTI) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने फैसला किया है कि अपनी जांच में सामने आए तथ्यों और सबूतों को अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के साथ साझा किया जाएगा, ताकि मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जा सके। मामला अमेरिका स्थित संगठन TTI से जुड़े विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए भारत, खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों में धन पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है।

₹92.55 करोड़ के इस्तेमाल पर ED की गंभीर आपत्ति

ED का दावा है कि TTI से जुड़े विदेशी डेबिट कार्डों के माध्यम से भारत में कम से कम ₹92.55 करोड़ खर्च किए गए। एजेंसी का आरोप है कि यह धन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि धन के स्रोत, उपयोग और लेन-देन के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी फंडिंग पर बढ़ी चिंता

ED के अनुसार, जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि विदेशी धन का इस्तेमाल देश के वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में भी किया गया। एजेंसी ने अपनी प्रारंभिक जांच में माना है कि यदि विदेशी फंड का उपयोग इस प्रकार के क्षेत्रों में किया गया है, तो यह गैरकानूनी गतिविधि (Unlawful Activity) की श्रेणी में आ सकता है। इसी आधार पर ED अब मामले की विस्तृत जांच और संभावित आपराधिक कार्रवाई के लिए CBI को अपने निष्कर्ष सौंपने जा रही है।

UAPA के दायरे में भी जांच की संभावना

प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विदेशी धन के इस्तेमाल का मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम – UAPA की धारा 2(ओ) के तहत भी जांच योग्य प्रतीत होता है। एजेंसी का मानना है कि यदि आगे की जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

CBI करेगी आगे की कानूनी कार्रवाई

ED के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक जुटाए गए दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन का ब्यौरा और अन्य साक्ष्य CBI को सौंपे जाएंगे। इसके बाद CBI तय करेगी कि किन धाराओं में आगे कार्रवाई की जाए और किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच आवश्यक है। यह मामला विदेशी फंडिंग, राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय कानूनों के पालन से जुड़ा होने के कारण जांच एजेंसियों की प्राथमिकता में माना जा रहा है।

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