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अंतरिक्ष में पहली बार ‘स्पेस रेस्क्यू मिशन’: धरती पर गिरने से पहले अपने टेलीस्कोप को बचाएगा नासा

साइंस एंड टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 1 जुलाई 2026

अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में पहली बार नासा अपने ही एक पुराने अंतरिक्ष टेलीस्कोप को पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट होने से बचाने के लिए एक साहसिक रोबोटिक रेस्क्यू मिशन शुरू करने जा रहा है। अगर यह मिशन सफल रहा, तो भविष्य में पुराने और खराब हो रहे उपग्रहों तथा अंतरिक्ष यानों को भी नई जिंदगी देने का रास्ता खुल सकता है।

नासा का नील गेहरेल्स स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप, जिसे वर्ष 2004 में लॉन्च किया गया था, अब धीरे-धीरे अपनी कक्षा खोते हुए पृथ्वी की ओर नीचे आ रहा है। यदि इसे समय रहते ऊंची कक्षा में नहीं पहुंचाया गया, तो यह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।

इसी खतरे को टालने के लिए अमेरिकी स्पेस स्टार्टअप Katalyst ने LINK नाम का एक विशेष रोबोट तैयार किया है। यह रोबोट Pegasus रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन की सबसे अनोखी बात यह है कि रॉकेट किसी पारंपरिक लॉन्च पैड से नहीं, बल्कि उड़ते हुए विमान से हवा में छोड़ा जाएगा।

अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद LINK रोबोट सबसे पहले स्विफ्ट टेलीस्कोप का पता लगाएगा। इसके बाद अपनी तीन रोबोटिक भुजाओं की मदद से वह टेलीस्कोप को पकड़कर उसे लगभग 300 किलोमीटर ऊंची सुरक्षित कक्षा में ले जाने की कोशिश करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है।

नासा की खगोल वैज्ञानिक रेजिना कैपुटो के अनुसार यह मिशन कई मायनों में पूरी तरह नया है। उन्होंने कहा कि सफलता की संभावना फिलहाल “50-50” है, लेकिन यदि यह प्रयास सफल हुआ तो अंतरिक्ष अभियानों का भविष्य पूरी तरह बदल सकता है।

स्विफ्ट टेलीस्कोप को मूल रूप से सिर्फ दो साल के मिशन के लिए बनाया गया था, लेकिन यह पिछले 22 वर्षों से लगातार ब्रह्मांड में होने वाले शक्तिशाली गामा-रे विस्फोटों (Gamma-Ray Bursts) का अध्ययन कर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आज भी यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष वेधशालाओं में से एक है और इसकी क्षमताओं की बराबरी करने वाला दूसरा टेलीस्कोप फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

इस मिशन की अनुमानित लागत करीब 3 करोड़ डॉलर है, जबकि स्विफ्ट टेलीस्कोप के निर्माण पर लगभग 25 करोड़ डॉलर खर्च हुए थे। नासा का मानना है कि यदि यह मिशन सफल रहता है तो भविष्य में पुराने उपग्रहों को ईंधन भरने, उनकी मरम्मत करने, नई कक्षा में स्थापित करने और तकनीकी रूप से अपग्रेड करने जैसे मिशन भी संभव हो सकेंगे।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह मिशन केवल एक पुराने टेलीस्कोप को बचाने की कोशिश नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में “सैटेलाइट सर्विसिंग” के एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। यदि LINK अपने मिशन में कामयाब रहता है, तो आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष यानों को कबाड़ बनने से बचाकर उनकी उपयोगिता कई वर्षों तक बढ़ाई जा सकेगी।

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