[the_ad id="179"]
Home » International » अमेरिकी सांसद का बड़ा दावा: 30 साल में सबसे खराब दौर में भारत-अमेरिका रिश्ते, ट्रंप की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार

अमेरिकी सांसद का बड़ा दावा: 30 साल में सबसे खराब दौर में भारत-अमेरिका रिश्ते, ट्रंप की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 30 जून 2026

भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण दोनों देशों के रिश्ते पिछले 30 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं और दोनों देशों के बीच वर्षों में बना भरोसा कमजोर हुआ है।

वॉशिंगटन में आयोजित यू.एस.-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए रो खन्ना ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हुई हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच जो विश्वास दशकों में बना था, उसे गंभीर झटका लगा है।

रो खन्ना ने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान भारत के वहां तैनात राजदूत ने उनसे कहा था कि ट्रंप की नीतियों के कारण “एक पूरी पीढ़ी का भरोसा खो गया है।” हालांकि, इस कथित बातचीत पर भारत सरकार या भारतीय दूतावास की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

डेमोक्रेट सांसद ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों के आधार पर जुड़े महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को कमजोर करना दोनों के दीर्घकालिक हितों के लिए नुकसानदायक होगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक रणनीति और तकनीकी साझेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है। दोनों देश आर्थिक और सामरिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी घरेलू राजनीति में भारत को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की राय भी सामने आती रहती है।

फिलहाल रो खन्ना का यह बयान एक राजनीतिक टिप्पणी है। ट्रंप प्रशासन या अमेरिकी सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं भारत सरकार ने भी इस संबंध में कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका संबंध केवल किसी एक नेता या सरकार पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों पर आधारित हैं। ऐसे में भविष्य में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, यह दोनों सरकारों की नीतियों और आपसी संवाद पर निर्भर करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *