राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चंडीगढ़ | 30 जून 2026
पंजाब में धार्मिक ग्रंथों के अपमान (Sacrilege) को लेकर बनाए गए नए कानून पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा हाल ही में पारित ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार को एक महीने के भीतर कानून में संशोधन करने का अल्टीमेटम दिया है।
अकाल तख्त का आरोप है कि पंजाब सरकार ने यह संशोधन सिख समुदाय, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और अकाल तख्त से कोई औपचारिक सलाह या सहमति लिए बिना पारित कर दिया। संस्था का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इतने संवेदनशील विषय पर संबंधित धार्मिक संस्थाओं की राय लेना जरूरी था।
इसी मुद्दे पर अमृतसर में अकाल तख्त की एक विशेष बैठक बुलाई गई, जिसमें पंजाब सरकार के सिख मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के सिख विधायक और कई धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने सरकार से कहा कि कानून में मौजूद उन प्रावधानों को हटाया जाए जो सिख भावनाओं के विपरीत माने जा रहे हैं। उन्होंने सरकार को संशोधन के लिए एक महीने का समय दिया है।
क्या है विवाद?
पंजाब सरकार ने हाल ही में धार्मिक ग्रंथों के अपमान से जुड़े मामलों में कड़े दंड का प्रावधान करने के लिए कानून में संशोधन किया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों का सम्मान सुनिश्चित करना और ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करना है।
हालांकि अकाल तख्त का कहना है कि कानून के कुछ प्रावधान सिख धार्मिक परंपराओं और अधिकारों से जुड़े संवेदनशील पहलुओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए कानून को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और धार्मिक संस्थाओं से परामर्श होना चाहिए था।
सरकार पर बढ़ा दबाव
अकाल तख्त की आपत्ति के बाद पंजाब सरकार पर राजनीतिक और धार्मिक दबाव बढ़ गया है। विपक्षी दल भी सरकार से कानून की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं। यदि सरकार संशोधन नहीं करती है तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि कानून का उद्देश्य केवल धार्मिक ग्रंथों की गरिमा की रक्षा करना है और किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार अकाल तख्त की आपत्तियों पर क्या फैसला लेती है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पंजाब में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर राजनीतिक माहौल पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और सिख धार्मिक नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।



