राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जून 2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू की जा रही तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लेकर अपने हालिया फैसले में बड़ा संशोधन किया है। बोर्ड ने कक्षा 7, 8 और 9 के उन विद्यार्थियों को राहत दी है जो पहले से फ्रेंच, जर्मन, जापानी, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार अब इन छात्रों को बीच शैक्षणिक सत्र में अपनी विदेशी भाषा छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी।
CBSE की नई गाइडलाइन के मुताबिक, वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में अध्ययनरत छात्र अपनी चुनी हुई विदेशी भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, इसके साथ उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (भारतीय भाषा) भी पढ़नी होगी। बोर्ड के इस फैसले को छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि पिछले निर्णय के बाद देशभर में व्यापक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।
दरअसल, मई 2026 में जारी CBSE के एक सर्कुलर में कहा गया था कि कक्षा 9 के छात्रों को नई तीन-भाषा नीति अपनानी होगी, जिसके तहत पढ़ाई जाने वाली तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस निर्देश के बाद अनेक स्कूलों ने फ्रेंच, जर्मन, जापानी और स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ रहे छात्रों को बीच सत्र में भाषा बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इससे हजारों छात्र और उनके अभिभावक परेशान हो गए थे।
अभिभावकों का कहना था कि एक शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद अचानक भाषा बदलना छात्रों के लिए व्यावहारिक नहीं है। कई विद्यार्थियों ने वर्षों तक विदेशी भाषा का अध्ययन किया है और अब उन्हें परीक्षा से ठीक पहले नई भारतीय भाषा सीखने के लिए कहना उनकी पढ़ाई और प्रदर्शन दोनों को प्रभावित कर सकता है। कई स्कूलों ने भी बोर्ड के समक्ष यह चिंता जताई थी कि बीच सत्र में नई भाषा लागू करना प्रशासनिक और शैक्षणिक दृष्टि से कठिन होगा।
इन आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद CBSE ने संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान बैच के छात्रों के लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था लागू रहेगी ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। इसका उद्देश्य नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करते हुए छात्रों के हितों की भी रक्षा करना है।
संशोधित दिशा-निर्देशों में एक और महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि वर्तमान कक्षा 10 के छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी। वे अपनी पढ़ाई पहले से लागू नियमों के अनुसार ही पूरी करेंगे। यानी इस बैच के विद्यार्थियों को भाषा संबंधी किसी नए बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और छात्रों को बहुभाषी शिक्षा उपलब्ध कराना है। नीति में मातृभाषा और भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष बल दिया गया है। इसी उद्देश्य के तहत तीन-भाषा फार्मूले को लागू किया जा रहा है। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञ लगातार यह भी कहते रहे हैं कि किसी भी बड़े शैक्षणिक बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए ताकि छात्रों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CBSE का यह संशोधित फैसला व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे छात्रों को मानसिक तनाव से राहत मिलेगी और स्कूलों को भी नई व्यवस्था लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। साथ ही भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का लक्ष्य भी बरकरार रहेगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भविष्य में बोर्ड को भाषा नीति के क्रियान्वयन को लेकर और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे, ताकि राज्यों, स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों के बीच किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो। भाषा शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य, उच्च शिक्षा और वैश्विक अवसरों से भी जुड़ा मुद्दा है।
CBSE के इस संशोधित फैसले को फिलहाल छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि बोर्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को लागू करते समय जमीनी चुनौतियों और हितधारकों की चिंताओं को भी ध्यान में रख रहा है। आने वाले वर्षों में तीन-भाषा नीति का प्रभावी और संतुलित क्रियान्वयन भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होगा।




