राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 29 जून 2026
अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति और गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच रविवार को तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। एक ओर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर “4C फॉर्मूला” अपनाने का आरोप लगाया, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें खुलकर कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन का समर्थन करने की चुनौती दे दी।
राम मंदिर चंदा विवाद की शुरुआत तब हुई थी, जब सपा नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडेय ने आरोप लगाया कि मंदिर में आए ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ तक के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी हुई है। इसके बाद 13 जून को राज्य सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच जारी है।
अखिलेश का ‘4C फॉर्मूला’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अब “नेशन फर्स्ट” नहीं, बल्कि “डोनेशन फर्स्ट” की राजनीति कर रही है। उन्होंने भाजपा पर “4C फॉर्मूला” अपनाने का आरोप लगाया, जिसमें चंदा, चोरी, चतुराई और चालाकी शामिल है।
अखिलेश ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के “समाजवादी PDA ऑडिट” में भर्ती परीक्षाओं, अयोध्या और अन्य मामलों में कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने लोगों की आस्था को भी प्रभावित किया है।
योगी का पलटवार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए उन्हें मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर खुलकर समर्थन देने की चुनौती दी।
हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि अयोध्या को भगवान राम के भक्त पहले ही भव्य बना चुके हैं। उन्होंने अखिलेश यादव से रामलला के दर्शन करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में धार्मिक आस्था की बात करते हैं, तो उन्हें श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन का भी समर्थन करना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि यदि अखिलेश वास्तव में अयोध्या की चिंता करते हैं, तो उन्हें मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सम्मान की बहाली के लिए भी सार्वजनिक रूप से आगे आना चाहिए।
जांच जारी, आरोपों की पुष्टि बाकी
राम मंदिर चंदा विवाद की जांच फिलहाल एसआईटी कर रही है। अब तक जांच एजेंसियों ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल, यह मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।




