[the_ad id="179"]
Home » Blog » H-1B का ‘अमेरिकन ड्रीम’ या धोखे का जाल? भारतीयों को कैसे फंसाती हैं ‘देसी कंसल्टेंसी’

H-1B का ‘अमेरिकन ड्रीम’ या धोखे का जाल? भारतीयों को कैसे फंसाती हैं ‘देसी कंसल्टेंसी’

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जून 2026

अमेरिका में नौकरी और ग्रीन कार्ड का सपना देखने वाले हजारों भारतीय युवाओं के लिए H-1B वीज़ा सबसे बड़ा रास्ता माना जाता है। लेकिन एक नई किताब ने दावा किया है कि यही सपना कई बार शोषण, फर्जीवाड़े और कानूनी जाल में बदल जाता है।

पत्रकार तनुल ठाकुर की पुस्तक Wild Wild East के अनुसार, कुछ तथाकथित “देसी कंसल्टेंसी” या “बॉडी शॉप्स” भारतीय आईटी पेशेवरों को आकर्षक नौकरी, ऊंची सैलरी और H-1B वीज़ा का वादा करके अमेरिका ले जाती हैं। लेकिन वहां पहुंचने के बाद कई लोगों को पता चलता है कि जिस नौकरी का वादा किया गया था, वह वास्तव में मौजूद ही नहीं है।

फर्जी रिज्यूमे और प्रॉक्सी इंटरव्यू का खेल

किताब के मुताबिक, कई नए इंजीनियरों और छात्रों से उनके अनुभव को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने वाले फर्जी रिज्यूमे तैयार करवाए जाते हैं। कुछ मामलों में तकनीकी इंटरव्यू के दौरान किसी और व्यक्ति से जवाब दिलवाए जाने (Proxy Interview) का भी आरोप लगाया गया है। नौकरी मिलने के बाद कर्मचारियों को वास्तविक काम करने के लिए दूर बैठे विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ती है।

महीनों तक बिना वेतन, भीड़भाड़ वाले फ्लैट

रिपोर्ट के अनुसार, कई कर्मचारियों को अमेरिका पहुंचने के बाद छोटे-छोटे अपार्टमेंट में कई लोगों के साथ रहने को मजबूर किया जाता है। प्रोजेक्ट न मिलने पर महीनों तक वेतन रोक दिया जाता है या कम कर दिया जाता है। H-1B वीज़ा नियोक्ता (Employer) से जुड़ा होने के कारण कर्मचारी नौकरी छोड़ने या शिकायत करने से भी डरते हैं, क्योंकि इससे उनका कानूनी दर्जा और अमेरिका में रहने का अधिकार खतरे में पड़ सकता है।

आखिर क्यों नहीं निकल पाते इस जाल से?

H-1B वीज़ा की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह वीज़ा कर्मचारी नहीं, बल्कि प्रायोजक कंपनी (Sponsor Employer) से जुड़ा होता है। यदि कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, तो उसे बहुत कम समय में नया स्पॉन्सर ढूंढना पड़ता है, वरना उसे अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। इसी निर्भरता का फायदा कुछ कथित कंसल्टेंसी उठाती हैं।

आंध्र-तेलंगाना से सबसे ज्यादा नेटवर्क

किताब में दावा किया गया है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में आईटी शिक्षा और अमेरिका पलायन के लंबे इतिहास के कारण इस तरह की कंसल्टेंसी का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ। हालांकि लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वीज़ा धोखाधड़ी किसी एक राज्य या समुदाय तक सीमित नहीं है।

सुधार की मांग

लेखक ने H-1B व्यवस्था में कई सुधारों की मांग की है। इनमें कर्मचारियों को आसानी से नियोक्ता बदलने की अनुमति, स्टाफिंग कंपनियों की कड़ी जांच, न्यूनतम वेतन नियमों का सख्त पालन और वीज़ा धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई शामिल है।

H-1B वीज़ा को लेकर बहस अब केवल अमेरिका में विदेशी प्रतिभाओं को अवसर देने तक सीमित नहीं रह गई है। यह उन हजारों भारतीय युवाओं के अधिकारों और सुरक्षा का भी सवाल बन गई है, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में अमेरिका का रुख करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *