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राम मंदिर चढ़ावा : FIR से गिरफ्तारी तक… क्या है पूरा गबन प्रकरण, किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | अयोध्या | 27 जून 2026

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर उठे सवाल अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहे। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच के बाद दर्ज एफआईआर के आधार पर पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामला मंदिर में चढ़ाए गए दान की नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ा है और इसने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और पूरी दान व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया। बढ़ते विवाद और जनदबाव के बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया। जांच दल को दानपात्रों की व्यवस्था, नकदी की गिनती, सुरक्षा प्रणाली, रिकॉर्ड और पूरी प्रक्रिया की जांच का जिम्मा सौंपा गया।

SIT की प्रारंभिक जांच के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि दानपात्रों से निकाली गई नकदी की गिनती और छंटाई के दौरान सुनियोजित तरीके से रकम और बहुमूल्य वस्तुओं में हेरफेर किया गया। जांच में यह भी आरोप दर्ज किया गया कि चढ़ावे में आए सोने-चांदी सहित अन्य कीमती सामान को निर्धारित प्रक्रिया से अलग रखकर छिपाया जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गतिविधि संगठित तरीके से संचालित की जा रही थी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत चोरी, आपराधिक न्यासभंग, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में मंदिर की चढ़ावा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के एक करीबी सहयोगी का भी नाम शामिल है। हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारी के खिलाफ कोई आधिकारिक आपराधिक कार्रवाई या आरोप घोषित नहीं किए गए हैं।

पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि राम मंदिर जैसी संवेदनशील और देश की सबसे अधिक निगरानी वाली धार्मिक संस्था में चढ़ावे की गिनती सीसीटीवी कैमरों, बहुस्तरीय सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती थी, तो SIT की जांच में इतनी गंभीर गड़बड़ियां सामने कैसे आईं? यदि प्रारंभिक जांच में पर्याप्त आधार नहीं मिले होते तो न एफआईआर दर्ज होती और न ही आठ लोगों की गिरफ्तारी होती। यही कारण है कि अब बहस केवल गिरफ्तार कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर केंद्रित हो गई है।

विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि पूरी दान व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए। दूसरी ओर जांच एजेंसियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दान गिनती के दस्तावेज, नकदी का मिलान और अन्य साक्ष्यों की जांच अभी जारी है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा है। राम मंदिर में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के साथ दान करते हैं। ऐसे में इस प्रकरण की निष्पक्ष, व्यापक और पारदर्शी जांच केवल कानूनी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखने की भी सबसे बड़ी कसौटी बन गई है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट क्या कहती है और क्या जांच इस मामले की पूरी सच्चाई तथा जिम्मेदारी तय करने तक पहुंचती है।

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