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मोहन यादव भूमि विवाद: कांग्रेस ने उठाए ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ जैसे सवाल, पूछे 5 बड़े प्रश्न

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 जून 2026

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की कथित भूमि खरीद को लेकर कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि जिन क्षेत्रों में बाद में बड़े विकास कार्य और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं आईं, वहां पहले से जमीन खरीदकर लाभ लेने की कोशिश की गई। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को “इनसाइडर ट्रेडिंग” जैसी स्थिति बताते हुए पांच बड़े सवाल सार्वजनिक रूप से उठाए हैं।

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को भविष्य की सरकारी योजनाओं की पूर्व जानकारी हो और उसी आधार पर निवेश किया जाए, तो शेयर बाजार की भाषा में उसे “इनसाइडर ट्रेडिंग” कहा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के परिवार ने उन क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में भूमि खरीदी, जहां बाद में विकास परियोजनाएं प्रस्तावित या शुरू हुईं।

कांग्रेस का दावा है कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सिंहस्थ-2028 से जुड़ी विकास योजनाओं, हाईवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बीच भूमि खरीद के पैटर्न ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यह केवल जमीन खरीद का मामला नहीं, बल्कि सत्ता, सूचना और संभावित लाभ के बीच संबंधों की जांच का विषय है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मुद्दे पर पांच सवाल पूछे हैं—

1. क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार ने बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी?

2. क्या खरीदी गई जमीन उन्हीं क्षेत्रों में स्थित है जहां बाद में विकास परियोजनाएं शुरू हुईं?

3. क्या सरकार संबंधित परियोजनाओं की पूरी टाइमलाइन सार्वजनिक करेगी?

4. यदि सब कुछ पारदर्शी है तो क्या स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाएगी?

5. क्या मुख्यमंत्री 2023 के बाद उनके परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों पर श्वेत पत्र जारी करेंगे?

पवन खेड़ा ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि भूमि खरीद और विकास परियोजनाओं के बीच क्या संबंध है। उनका कहना था कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो सरकार को सभी तथ्यों को सार्वजनिक कर संदेह दूर करना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है क्योंकि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास और शासन की पारदर्शिता से जुड़ा प्रश्न है।

फिलहाल कांग्रेस इस मामले को लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि जब तक भूमि खरीद, विकास परियोजनाओं और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक नहीं होते, तब तक सवाल बने रहेंगे। अब राजनीतिक बहस का केंद्र यही है कि क्या इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी या नहीं।

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