अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 24 जून 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत के टैरिफ को लेकर इतनी गलतफहमी थी कि वे मानते थे कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर 175 प्रतिशत या उससे भी अधिक शुल्क लगाता है। यही नहीं, जब उनके अपने वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने आधिकारिक आंकड़े सामने रखे तो ट्रंप उन पर ही भड़क गए और सरकारी आंकड़ों को “बकवास” करार दे दिया।
यह दावा न्यूयॉर्क टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार मैगी हेबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब “Regime Change: Inside the Imperial Presidency of Donald Trump” में किया गया है।
किताब के अनुसार ट्रंप लगातार अधिकारियों से पूछ रहे थे कि चीन और भारत अमेरिका पर कितना टैरिफ लगाते हैं। जब उन्हें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के आधिकारिक आंकड़े दिखाए गए तो उन्होंने गुस्से में कहा, “मुझे कोई सही आंकड़े नहीं दे रहा। तुम लोग मुझे बकवास आंकड़े दे रहे हो।”
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप को विश्वास था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर कम से कम 175 प्रतिशत शुल्क लगाता है। जबकि अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक आंकड़े इससे काफी कम थे। इसके बावजूद ट्रंप ने सरकारी डेटा को ही खारिज कर दिया।
भारत को लेकर ट्रंप प्रशासन का यह नजरिया बाद में दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद की बड़ी वजह बना। अगस्त 2025 में ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने का आरोप लगाते हुए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
उस समय ट्रंप ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुंचा रहा है। इस फैसले के बाद भारत उन देशों में शामिल हो गया था जिन पर अमेरिका ने सबसे ज्यादा टैरिफ लगाए थे।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी दस्तावेजों में यह भी कहा गया था कि भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका पर सबसे ऊंचे टैरिफ लगाने वाले देशों में शामिल है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार कृषि उत्पादों पर भारत का औसत टैरिफ 37 प्रतिशत तक और कुछ ऑटोमोबाइल उत्पादों पर 100 प्रतिशत से अधिक था।
टैरिफ विवाद के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ गया था। व्यापार वार्ताओं पर असर पड़ा और दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें भी टल गई थीं।
हालांकि फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते का ढांचा तैयार कर लिया। इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका दोनों ने कई उत्पादों पर शुल्क कम करने पर सहमति जताई। इसके बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का रास्ता साफ हुआ।
समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, फल, सोयाबीन तेल, ड्राई डिस्टिलर्स ग्रेन, वाइन और अन्य वस्तुओं पर टैरिफ कम करने का वादा किया। वहीं अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता के बाद अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने का निर्णय लिया।
अब किताब में सामने आए इस खुलासे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के राष्ट्रपति व्यापारिक फैसले लेते समय वास्तविक आंकड़ों की बजाय अपनी धारणाओं पर अधिक भरोसा करते थे। यदि ऐसा है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में पैदा हुए कई विवादों की पृष्ठभूमि को समझना और आसान हो जाता है।




