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अडानी ग्रुप का बड़ा ऐलान: गैर-जरूरी काम होंगे आउटसोर्स, डेटा सेंटर और न्यूक्लियर एनर्जी में होगा विशाल निवेश

बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 24 जून 2026

अडानी समूह ने अगले दशक की अपनी महत्वाकांक्षी विकास रणनीति का खाका पेश करते हुए संगठनात्मक ढांचे और भविष्य के निवेश को लेकर बड़े ऐलान किए हैं। समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने बुधवार को अडानी एंटरप्राइजेज की वार्षिक आम बैठक (AGM) में कहा कि कंपनी गैर-कोर गतिविधियों को या तो अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में स्थानांतरित करेगी या फिर उन्हें तीसरे पक्ष के जरिए संचालित करेगी।

गौतम अडानी ने कहा कि समूह आने वाले दस वर्षों के लिए खुद को तैयार कर रहा है और इसके लिए तीन बुनियादी कदम उठाए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य नौकरशाही को कम करना, जवाबदेही बढ़ाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया को जमीन स्तर तक पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि पूरे समूह में तीन-स्तरीय प्रशासनिक ढांचा लागू किया जाएगा, जिससे निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी कम होगी। अडानी ने कहा कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल पूंजी से नहीं बल्कि दक्षता, तकनीक और तेज निर्णय क्षमता से तय होगी।

बैठक के दौरान गौतम अडानी ने ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में बड़े निवेश की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि समूह 3 गीगावाट क्षमता का विशाल डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जो भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं की मांग को पूरा करेगा।

इसके अलावा अडानी समूह 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर एनर्जी) क्षमता विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। यदि यह योजना सफल होती है तो यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में अडानी समूह की आक्रामक मौजूदगी आने वाले वर्षों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। देश में डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई आधारित तकनीकों की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है।

गौतम अडानी ने संकेत दिया कि समूह अब अपने संसाधनों को मुख्य व्यवसायों पर केंद्रित करना चाहता है। इसी रणनीति के तहत गैर-जरूरी और सहायक गतिविधियों को आउटसोर्स किया जाएगा ताकि प्रबंधन का पूरा ध्यान ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, हवाई अड्डों, डेटा सेंटर, रक्षा, हरित ऊर्जा और नई तकनीकों जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रह सके।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अडानी समूह का यह पुनर्गठन वैश्विक कॉरपोरेट मॉडल के अनुरूप है, जहां कंपनियां अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सपोर्ट और बैक-ऑफिस कार्यों को विशेषीकृत इकाइयों या बाहरी एजेंसियों को सौंपती हैं।

AGM में प्रस्तुत रोडमैप से यह स्पष्ट संकेत मिला कि अडानी समूह केवल मौजूदा कारोबार का विस्तार नहीं कर रहा, बल्कि भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था—डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा और उच्च तकनीक—पर बड़ा दांव लगा रहा है।

आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि डेटा सेंटर, न्यूक्लियर एनर्जी और प्रशासनिक पुनर्गठन की यह रणनीति अडानी समूह को वैश्विक स्तर पर किस नई ऊंचाई तक पहुंचाती है।

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