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उद्धव ठाकरे की बढ़ीं मुश्किलें: 6 सांसदों के बाद अब 3 विधायक और एक MLC भी बैठक से गायब

राष्ट्रीय/राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 23 जून 2026

एक के बाद एक झटकों से घिरी उद्धव सेना

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को जहां पार्टी के छह सांसदों ने औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया, वहीं अब पार्टी संगठन में एक और संभावित टूट की चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के तीन विधायक और एक विधान परिषद सदस्य (MLC) अनुपस्थित रहे, जिससे राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

राजनीतिक गलियारों में इन नेताओं की गैरमौजूदगी को साधारण अनुपस्थिति नहीं बल्कि संभावित राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह घटनाक्रम उद्धव गुट के लिए नई चिंता बनकर उभरा है।

सांसदों के जाने के तुरंत बाद बढ़ी बेचैनी

सोमवार को ही “ऑपरेशन टाइगर” के तहत शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिंदे गुट में शामिल होने का ऐलान किया था। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक माना जा रहा है। सांसदों के जाने से पहले ही पार्टी विधायकों और पदाधिकारियों के बीच असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं।

अब बैठक से विधायकों और एमएलसी की अनुपस्थिति ने इस धारणा को और मजबूत कर दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष अभी पूरी तरह थमा नहीं है।

नेतृत्व के सामने अस्तित्व की चुनौती

2022 में हुए ऐतिहासिक विभाजन के बाद से उद्धव ठाकरे लगातार संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। पहले बड़ी संख्या में विधायक एकनाथ शिंदे के साथ चले गए, फिर चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को सौंप दिया। अब सांसदों के पलायन और विधायकों की कथित नाराजगी ने उद्धव ठाकरे के सामने संगठनात्मक संकट को और गहरा कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि शिवसेना की राजनीतिक विरासत और नेतृत्व की स्वीकार्यता की लड़ाई भी है।

शिंदे गुट का बढ़ता आत्मविश्वास

दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे गुट लगातार मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। छह सांसदों के शामिल होने के बाद शिंदे खेमे का आत्मविश्वास बढ़ा है और पार्टी नेताओं का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी नेता उनके साथ आ सकते हैं।

हालांकि अभी तक बैठक से अनुपस्थित विधायकों या एमएलसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनकी गैरहाजिरी ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।

महाराष्ट्र की राजनीति पर सबकी नजर

महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के बीच सामने आए इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बैठक से गायब बताए जा रहे विधायक और एमएलसी आगे क्या रुख अपनाते हैं। यदि आने वाले दिनों में और नेताओं का समर्थन शिंदे गुट को मिलता है, तो उद्धव ठाकरे के लिए संगठन को संभालना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि छह सांसदों के जाने के बाद शुरू हुआ संकट अभी खत्म नहीं हुआ है और महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना बनाम शिवसेना की लड़ाई नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।

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