अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | जिनेवा/वाशिंगटन | 22 जून 2026
स्विट्जरलैंड में हुई मैराथन वार्ता से निकला समझौते का रोडमैप
पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता ने एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने 60 दिनों के भीतर एक स्थायी और व्यापक समझौते तक पहुंचने के लिए रोडमैप पर सहमति जताई है। वार्ता का पहला चरण समाप्त होने के बाद मध्यस्थ देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि दोनों पक्षों ने आगे की तकनीकी बातचीत तुरंत शुरू करने और अंतिम समझौते की दिशा में काम करने का निर्णय लिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल युद्धविराम को बचाने की कोशिश नहीं है, बल्कि पिछले कई दशकों से चले आ रहे अमेरिका-ईरान टकराव को नई दिशा देने का प्रयास भी है।
लेबनान संघर्ष रोकने के लिए बनेगा विशेष “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल”
वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक लेबनान को लेकर सामने आई है। अमेरिका और ईरान ने लेबनान में सैन्य गतिविधियों को रोकने तथा युद्धविराम लागू कराने के लिए एक विशेष “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” बनाने पर सहमति व्यक्त की है। इस व्यवस्था में लेबनान सरकार, अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देश शामिल होंगे।
पिछले कुछ महीनों में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया था। कई बार ऐसा लगा कि यह टकराव अमेरिका-ईरान समझौते को पटरी से उतार सकता है। ऐसे में लेबनान के मोर्चे पर सहमति को वार्ता की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत, ईरानी तेल को मिली 60 दिन की छूट
वार्ता के बाद अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत की घोषणा की है। अमेरिकी वित्त विभाग ने 60 दिनों के लिए विशेष लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत ईरान को तेल उत्पादन, निर्यात और बिक्री की अनुमति मिलेगी।
यह छूट 21 अगस्त तक प्रभावी रहेगी और इसे अंतरिम समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिल सकती है और तेल कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। साथ ही ईरान की अर्थव्यवस्था को भी तत्काल राहत मिलने की संभावना है।
परमाणु कार्यक्रम पर भी बढ़ी सहमति
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता के बाद कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को फिर से अपने देश में प्रवेश देने पर सहमत हो गया है। अमेरिका इसे वार्ता की बड़ी उपलब्धि मान रहा है।
वेंस ने कहा कि यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पारदर्शिता बढ़ाएगा और भविष्य में किसी भी संभावित परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। हालांकि ईरान ने इस मुद्दे पर अभी सीमित प्रतिक्रिया दी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच इस विषय पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव कम करने की कोशिश
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी वार्ता में सकारात्मक संकेत मिले हैं। दोनों देशों ने संचार तंत्र विकसित करने और जहाजरानी को सुचारु बनाए रखने पर सहमति जताई है।
हाल के दिनों में ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई थी। इसके बावजूद कतर के कई एलएनजी टैंकर इस मार्ग से गुजरते देखे गए। अमेरिका और ईरान के बीच इस मुद्दे पर संवाद आगे बढ़ना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है।
ईरान ने बताया बड़ी कूटनीतिक सफलता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता को सकारात्मक बताते हुए कहा कि पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से लेबनान युद्ध को समाप्त करने की दिशा में “बड़ी प्रगति” हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगी कई बाधाओं को हटाने, कुछ जमे हुए फंड जारी करने और पुनर्निर्माण योजनाओं पर भी सहमति बनी है।
तेहरान इस वार्ता को अपनी आर्थिक और कूटनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने की दिशा में कदम बता रहा है।
भारत भी सक्रिय, डोभाल ने ईरानी अधिकारियों से की मुलाकात
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत ने भी कूटनीतिक सक्रियता दिखाई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नई दिल्ली में ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी गादिर नेजामीपोर से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत-ईरान संबंधों पर चर्चा की।
भारत के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर उसके अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ऊर्जा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है।
अभी लंबा है समझौते का सफर
हालांकि दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया है, लेकिन अंतिम समझौता अभी दूर है। आने वाले 60 दिनों में तकनीकी स्तर की बातचीत होगी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों की समाप्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा, तेल निर्यात और आर्थिक सहयोग जैसे जटिल मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड वार्ता ने युद्ध से बातचीत की दिशा में रास्ता जरूर खोला है, लेकिन अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी भरोसे को कितना आगे बढ़ा पाते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय बाद कूटनीति ने युद्ध पर बढ़त बनानी शुरू कर दी है।




