राष्ट्रीय/अर्थव्यवस्था | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 22 जून 2026
‘विकसित बंगाल’ के विजन के साथ पेश हुआ पहला पूर्ण बजट
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी सरकार ने सोमवार को अपना पहला पूर्ण बजट विधानसभा में पेश किया। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने 4.38 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य “विकसित भारत” के साथ-साथ “विकसित बंगाल” का निर्माण करना है। बजट में एक ओर उद्योगों और निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर किसानों, गरीबों, पिछड़े वर्गों और सामाजिक कल्याण योजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि नई सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का भी संकेत है।
उद्योगों को नई उड़ान देने की तैयारी
नई सरकार ने पश्चिम बंगाल के औद्योगिक पुनरुद्धार को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। बजट में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना की घोषणा की गई है। सरकार का मानना है कि लंबे समय से उद्योगों के पलायन और निवेश की कमी से राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। इसलिए अब निवेशकों को आकर्षित करने, नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने और रोजगार सृजन को गति देने के लिए विशेष पैकेज तैयार किया गया है।
सरकार का दावा है कि यह नीति पश्चिम बंगाल को पूर्वी भारत के औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। विशेष रूप से विनिर्माण, लघु एवं मध्यम उद्योग, लॉजिस्टिक्स और नई तकनीक आधारित क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
एक लाख नौकरियों का बड़ा वादा
बजट की सबसे चर्चित घोषणाओं में राज्य में एक लाख नई नौकरियां देने का वादा शामिल है। बेरोजगारी लंबे समय से पश्चिम बंगाल की बड़ी राजनीतिक और सामाजिक चुनौती रही है। ऐसे में सरकार ने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी रोजगार सृजन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए उद्योगों को रोजगार आधारित प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
कल्याणकारी योजनाओं की परंपरा बरकरार
हालांकि बीजेपी सरकार ने उद्योग और निवेश पर विशेष जोर दिया है, लेकिन उसने पश्चिम बंगाल की लंबे समय से चली आ रही कल्याणकारी राजनीति को भी जारी रखा है। बजट में किसानों, गरीब परिवारों, महिलाओं और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए कई योजनाओं के लिए पर्याप्त आवंटन किया गया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सरकार यह संदेश देना चाहती है कि आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा दोनों साथ-साथ चलेंगे। यही कारण है कि बजट में विकास और कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
आशा कार्यकर्ताओं और सिविक वॉलंटियर्स को राहत
स्वास्थ्य और जनसेवा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की गई है, जो लंबे समय से बेहतर वेतन की मांग कर रही थीं। इसके अलावा सिविक पुलिस वॉलंटियर्स के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई है।
सरकार का कहना है कि कोविड महामारी और उसके बाद के वर्षों में इन कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उनके आर्थिक हितों की रक्षा करना जरूरी है। इस कदम को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सरकार के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है।
राजस्व और विकास के बीच संतुलन की चुनौती
हालांकि बजट में कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं की गई हैं, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाना होगा। एक ओर उद्योगों को प्रोत्साहन देना है, दूसरी ओर सामाजिक योजनाओं पर खर्च भी जारी रखना है। ऐसे में राजस्व संग्रह बढ़ाना और निवेश आकर्षित करना सरकार की सफलता का प्रमुख आधार बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्योगों में निवेश बढ़ता है और रोजगार सृजन होता है तो सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। लेकिन यदि निवेश अपेक्षित स्तर पर नहीं आया तो कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाना कठिन हो सकता है।
ममता युग से अलग लेकिन पूरी तरह अलग नहीं
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बजट एक दिलचस्प मिश्रण प्रस्तुत करता है। बीजेपी सरकार ने विकास, निवेश और रोजगार पर अपना वैचारिक जोर दिखाया है, लेकिन साथ ही उसने राज्य की कल्याणकारी राजनीति की परंपरा को भी जारी रखा है। यही कारण है कि कई राजनीतिक विश्लेषक इसे “परिवर्तन के साथ निरंतरता” वाला बजट बता रहे हैं।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि उद्योगों के लिए घोषित प्रोत्साहन योजनाएं कितनी सफल होती हैं और एक लाख नौकरियों का वादा किस हद तक जमीन पर उतर पाता है। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार ने अपने पहले बजट के जरिए रोजगार, निवेश और कल्याण के संतुलित मॉडल पर आगे बढ़ने का संकेत दे दिया है।




