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स्विट्जरलैंड में आज अमेरिका-ईरान वार्ता, लेबनान में संघर्ष और होर्मुज विवाद से बढ़ी चुनौती

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | जिनेवा/तेहरान | 21 जून 2026

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते को लागू करने के लिए आज स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में महत्वपूर्ण वार्ता होने जा रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया के पहले चरण के लिए आमने-सामने होंगे। हालांकि लेबनान में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुए विवाद ने बातचीत को और जटिल बना दिया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता रविवार को शुरू होगी। पाकिस्तान स्वयं को इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका में प्रस्तुत कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं।

इस बीच लेबनान में युद्धविराम लागू होने के कुछ ही घंटों बाद इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच फिर हिंसा भड़क उठी। लेबनानी मीडिया के अनुसार इजरायली हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है। वहीं इजरायल का दावा है कि हिज्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में उसके ठिकानों पर 50 से अधिक प्रोजेक्टाइल दागे, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई।

हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा है कि लगातार हमलों का जवाब दिया जाएगा। लेबनान की सांसद नजात आउन सलीबा ने कहा कि देश के लोग लगातार हिंसा और विनाश से थक चुके हैं और अब शांति चाहते हैं।

उधर ईरान ने इजरायली हमलों और अमेरिका द्वारा समझौते की शर्तों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने का दावा किया है। हालांकि अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि जलडमरूमध्य खुला है और शनिवार को 55 वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित रूप से वहां से गुजर चुके हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर आवाजाही सामान्य बनी हुई है।

ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि यदि समझौता केवल कागजों तक सीमित रहा और उसका पालन नहीं हुआ, तो पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती रहेगी। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और उन्हें समाधान की उम्मीद है।

विश्लेषकों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में शुरू होने वाली यह वार्ता न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

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