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ट्रंप ने नेतन्याहू को लगाई फटकार? बोले—‘मेरे बिना इज़राइल नहीं होता, लेबनान पर हमले बंद करो’

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | एवियन-ले-बैंस (फ्रांस) | 16 जून 2026

फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद खुलकर सामने आते दिखाई दिए। ट्रंप ने लेबनान पर जारी इज़राइली हमलों को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई और कहा कि अब नेतन्याहू को अधिक जिम्मेदार रवैया अपनाना होगा।

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के बिना इज़राइल का अस्तित्व संभव नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में इज़राइल को जो समर्थन मिला, वह किसी अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति ने देने का साहस नहीं किया था।

ट्रंप ने कहा, “अमेरिका के बिना इज़राइल नहीं होता और मेरे बिना भी इज़राइल नहीं होता, क्योंकि किसी दूसरे राष्ट्रपति ने वह नहीं किया जो मैंने किया।”

लेबनान हमलों पर जताई नाराज़गी

अमेरिकी राष्ट्रपति ने लेबनान में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल के हमलों का समय और उनका पैमाना उन्हें पसंद नहीं आया। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में इज़राइली नेतृत्व को अपनी नाराज़गी से अवगत करा दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने लेबनान पर इज़राइली बमबारी को “बहुत ज़्यादा” और “अनावश्यक रूप से आक्रामक” बताया। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की तलाश में पूरी इमारतें गिरा देना उचित नहीं है, क्योंकि उन इमारतों में रहने वाले सभी लोग हिज़्बुल्लाह से जुड़े नहीं होते।

युद्धविराम समझौते में लेबनान बना अहम मुद्दा

सूत्रों के अनुसार अमेरिका-ईरान शांति समझौते की प्रक्रिया में ईरान ने लेबनान पर इज़राइली हमलों को रोकने की शर्त भी रखी है। बताया जा रहा है कि इसी मुद्दे को लेकर नेतन्याहू और ट्रंप के बीच मतभेद उभरे हैं।

हालांकि नेतन्याहू ने साफ कहा है कि इज़राइल अपनी सुरक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा। उन्होंने दोहराया कि गाज़ा, लेबनान और सीरिया में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों को तब तक बरकरार रखा जाएगा जब तक इज़राइल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।

ट्रंप ने सुझाया नया फॉर्मूला

G7 बैठक के दौरान ट्रंप ने एक नया सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि इज़राइल हिज़्बुल्लाह से निपटने के लिए लगातार व्यापक सैन्य कार्रवाई करता रहेगा, तो बेहतर होगा कि इस जिम्मेदारी को सीरिया संभाले।

ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कम समय में देश को स्थिर करने का प्रयास किया है और वे क्षेत्रीय सुरक्षा में भूमिका निभा सकते हैं।

अमेरिका-ईरान समझौते पर जताया भरोसा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तैयार हुआ शांति समझौता सफल रहेगा और अगले चरण की बातचीत पहले चरण की तुलना में आसान होगी। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि अमेरिका ईरान को कोई बड़ी आर्थिक सहायता देने जा रहा है।

दूसरी ओर कतर के अमीर ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और शांति की संभावनाएं बढ़ेंगी।

पश्चिम एशिया की राजनीति में नया मोड़

विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रंप वास्तव में लेबनान पर इज़राइली हमलों को सीमित करने के लिए दबाव बना रहे हैं, तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। पिछले कई वर्षों में अमेरिका आमतौर पर इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों का खुला समर्थन करता रहा है, लेकिन अब अमेरिका-ईरान समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता की जरूरतों ने समीकरण बदल दिए हैं।

G7 सम्मेलन के बीच सामने आए इन बयानों ने संकेत दिया है कि अमेरिका, इज़राइल, ईरान और अरब देशों के बीच नए कूटनीतिक समीकरण तेजी से आकार ले रहे हैं, जिनका असर आने वाले महीनों में पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है।

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