राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | रांची | 16 जून 2026
झारखंड में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराने का फैसला किया है। इस कदम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” और विधायकों पर अविश्वास का संकेत बता रहा है, जबकि NDA नेताओं का दावा है कि यह केवल चुनावी रणनीति, प्रशिक्षण और एकजुटता बनाए रखने के लिए किया गया है।
जानकारी के अनुसार NDA के अधिकांश विधायक रांची के रेडिसन ब्लू होटल पहुंच चुके हैं, जहां वे अगले 48 घंटे तक रहेंगे। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान करने के बाद ही उन्हें वापस जाने की अनुमति होगी। भाजपा विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि सभी विधायक स्वेच्छा से होटल में ठहरे हैं और यह पूरी तरह चुनावी तैयारी का हिस्सा है।
भाजपा विधायक सत्येंद्र तिवारी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसे “अपहरण” या “नजरबंदी” की तरह पेश करना गलत है। उन्होंने कहा कि सभी विधायक अपनी इच्छा से आए हैं और यहां बैठकों के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
हालांकि विपक्ष ने NDA के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि यदि किसी गठबंधन को अपने विधायकों पर भरोसा हो तो उन्हें होटल में रखने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री और INDIA गठबंधन को अपने विधायकों की निष्ठा पर पूरा भरोसा है, इसलिए उन्हें कहीं शिफ्ट नहीं किया गया।
राज्य की राजनीतिक गणित भी इस फैसले को महत्वपूर्ण बनाती है। 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में NDA के पास 24 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है। दूसरी ओर INDIA गठबंधन के पास 56 विधायक हैं। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग और राजनीतिक जोड़तोड़ की संभावनाओं को देखते हुए NDA कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने संख्या बल को लेकर पूछे गए सवालों पर कहा कि विधानसभा में कुल 81 वोट हैं और हर विधायक अपनी पसंद के अनुसार मतदान करेगा। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि होटल में विधायकों को एक साथ रखने का फैसला इस बात का संकेत है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर NDA बेहद सतर्क है।
गौरतलब है कि भारत की राजनीति में चुनावों से पहले विधायकों को होटल या रिसॉर्ट में ठहराने की परंपरा नई नहीं है। कई राज्यों में सरकार गठन, राज्यसभा चुनाव या विश्वास मत से पहले ऐसे कदम उठाए जाते रहे हैं। समर्थक इसे राजनीतिक प्रबंधन बताते हैं, जबकि आलोचक इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में अविश्वास और खरीद-फरोख्त की आशंका से जोड़कर देखते हैं।
अब 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह चुनाव केवल दो सीटों का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड की राजनीति में दलों की अंदरूनी एकजुटता और राजनीतिक रणनीति की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।




