विदेश | ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन/तेहरान | 16 जून 2026
पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान जब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल आपूर्ति लाइन स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ लगभग बंद पड़ी थी और ईरान की नाकेबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई थी, तब अमेरिका ने एक बेहद गोपनीय और अभूतपूर्व ऑपरेशन के जरिए करोड़ों बैरल तेल को खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकाल लिया। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने वही तकनीक अपनाई, जिसका इस्तेमाल वर्षों से ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए करता रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 की शुरुआत से अमेरिकी सैन्य निगरानी में बड़े पैमाने पर “शिप-टू-शिप ऑयल ट्रांसफर” अभियान चलाया गया। इस ऑपरेशन के तहत अब तक करीब 9 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद सुरक्षित रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाए गए। इस पूरे अभियान में कम से कम 92 जहाज शामिल रहे।
कैसे चला अमेरिकी गुप्त ऑपरेशन?
जानकारी के अनुसार तेल परिवहन के लिए संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा तट और ओमान के सोहार बंदरगाह के पास दो प्रमुख स्थानों का इस्तेमाल किया गया। छोटे टैंकर पहले निर्धारित बिंदुओं तक पहुंचते थे और फिर बहुत बड़े तेल वाहक जहाजों (VLCCs) को समुद्र के बीच तेल ट्रांसफर किया जाता था।
इस दौरान जहाजों के ट्रांसपोंडर बंद कर दिए जाते थे, रोशनी कम कर दी जाती थी और सैन्य निगरानी के लिए विशेष मार्ग निर्धारित किए जाते थे ताकि ईरानी हमलों या निगरानी से बचा जा सके।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस पूरे ऑपरेशन पर अमेरिकी सेना की सीधी नजर थी। समुद्र में सशस्त्र ड्रोन, निगरानी उपकरण और विशेष सुरक्षा व्यवस्था के जरिए जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया।
ईरान की रणनीति, अमेरिका का इस्तेमाल
विशेषज्ञों का कहना है कि शिप-टू-शिप ट्रांसफर तकनीक कोई नई नहीं है। ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए इसी पद्धति का इस्तेमाल करता रहा है। इससे तेल के वास्तविक स्रोत को छिपाना आसान हो जाता है।
फर्क सिर्फ इतना था कि ईरान आमतौर पर एक समय में सीमित जहाजों का उपयोग करता था, जबकि अमेरिकी अभियान बड़े पैमाने पर संचालित किया गया। एक साथ कई जहाजों की आवाजाही ने इस ऑपरेशन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना दिया।
क्या अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर इसी मिशन का हिस्सा था?
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 9 जून को हॉरमुज़ क्षेत्र में गिराया गया अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर इसी तेल परिवहन मिशन से जुड़ा हुआ था। चार अलग-अलग सूत्रों ने बताया कि हेलीकॉप्टर ऑपरेशन की निगरानी या सुरक्षा से संबंधित भूमिका निभा रहा था।
उसी दिन उपग्रह तस्वीरों में ओमान के सोहार तट के पास कई तेल टैंकरों को एक छोटे समुद्री क्षेत्र में समूह बनाकर खड़ा देखा गया था। इसके बाद इस पूरे अभियान पर और अधिक सवाल उठने लगे।
अब खुल सकता है हॉरमुज़
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि शुक्रवार से हॉरमुज़ जलडमरूमध्य फिर से वैश्विक तेल व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान चलाया गया यह गुप्त तेल अभियान आने वाले वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और सुरक्षा मामलों में अध्ययन का विषय बना रहेगा। यह पहली बार है जब अमेरिका पर आरोप लगा है कि उसने वही समुद्री रणनीति अपनाई, जिसे लेकर वह वर्षों से ईरान की आलोचना करता रहा है।
इस खुलासे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या वैश्विक राजनीति में सिद्धांत परिस्थितियों के हिसाब से बदल जाते हैं, या फिर राष्ट्रीय हितों के सामने सभी नियम पीछे छूट जाते हैं?




