अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | एवियन-ले-बैंस (फ्रांस) | 16 जून 2026
फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान समझौते और वैश्विक सुरक्षा को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि रूस पर तेल प्रतिबंधों को फिर से कड़ा किया जा सकता है और जल्द ही रूसी तेल पर दी गई छूट समाप्त की जा सकती है। ट्रंप के इस बयान को मॉस्को पर नए दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते के बाद अब वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने लगी है और इसी कारण अमेरिका जल्द ही रूसी तेल पर दोबारा सख्त प्रतिबंध लगाने की स्थिति में होगा। उन्होंने साफ कहा कि रूस को अब युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करना चाहिए।
इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की भी G7 नेताओं के साथ बैठक में शामिल हुए। ज़ेलेंस्की ने दावा किया कि G7 देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि रूस युद्ध नहीं जीत रहा है और उसे बातचीत की मेज पर लाने के लिए अतिरिक्त प्रतिबंधों पर चर्चा की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द शांति समझौता नहीं हुआ तो रूस के लिए आने वाली सर्दियां बेहद कठिन साबित हो सकती हैं।
कनाडा ने भी रूस के खिलाफ नई कार्रवाई की घोषणा करते हुए उसकी तथाकथित “शैडो फ्लीट”, ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा उद्योग और दुष्प्रचार नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी रूस के एलएनजी परिवहन नेटवर्क और उससे जुड़े जहाजों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की।
फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंच चुके हैं। यह लगातार आठवां G7 सम्मेलन है जिसमें भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह वैश्विक दक्षिण (Global South) की आकांक्षाओं और चिंताओं को विश्व नेताओं के सामने मजबूती से रखेंगे।
G7 सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर ऐतिहासिक समझौता सामने आया है। यूरोपीय देशों की कोशिश है कि ईरान समझौते के साथ-साथ यूक्रेन संकट पर भी ठोस प्रगति हो और रूस पर दबाव बढ़ाकर युद्ध समाप्त कराया जाए।
विश्लेषकों का मानना है कि G7 का यह सम्मेलन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, ईरान समझौता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा इसके केंद्र में रहने वाले हैं। ट्रंप के ताजा बयान से यह भी संकेत मिला है कि अमेरिका अब ईरान समझौते के बाद अपना ध्यान पूरी तरह रूस-यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित कर सकता है।
दुनिया की निगाहें G7 नेताओं की बैठकों पर टिकी हैं, जहां आने वाले दिनों में रूस के खिलाफ और कड़े कदमों तथा यूक्रेन संकट के समाधान को लेकर बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।




