विदेश | ABC NATIONAL NEWS | जिनेवा/तेहरान | 16 जून 2026
पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव, सैन्य टकराव और आर्थिक प्रतिबंधों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते की चर्चा तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। यदि यह समझौता घोषित शर्तों के अनुसार लागू होता है, तो इसे हाल के दशकों में ईरान की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता और अमेरिका की बड़ी रणनीतिक रियायत के रूप में देखा जा सकता है।
प्रस्तावित समझौते के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनने की बात कही जा रही है:
समझौते के कथित प्रमुख बिंदु
1. अमेरिका देगा 300 बिलियन डॉलर का हर्जाना दावे के अनुसार अमेरिका ईरान को 300 बिलियन डॉलर का आर्थिक मुआवजा या पैकेज देगा। इसे ईरान पर वर्षों से लगे प्रतिबंधों और संघर्षों से हुए नुकसान की भरपाई के रूप में देखा जा रहा है।
2. अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटेगी समझौते के तहत अमेरिकी नेवी द्वारा लगाई गई समुद्री नाकेबंदी को अगले 30 दिनों के भीतर समाप्त किया जाएगा, जिससे समुद्री व्यापार सामान्य होने की उम्मीद है।
3. होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को 30 दिनों के भीतर ईरानी निगरानी और प्रबंधन के तहत पूरी तरह खोलने की बात कही जा रही है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को बड़ी राहत मिल सकती है।
4. ईरानी तेल निर्यात पर लगी रोक हटेगी ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त किए जाएंगे, जिससे ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार में दोबारा मजबूती से लौटने का अवसर मिलेगा।
5. ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान के परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता शामिल बताई जा रही है। वहीं अन्य विवादित परमाणु मुद्दों को फिलहाल ठंडे बस्ते में डालने की चर्चा है।
6. ईरान से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी दावों के अनुसार अमेरिका ईरान के आसपास या उससे जुड़े सैन्य ढांचे में अपनी प्रत्यक्ष सैन्य उपस्थिति कम करेगा और फोर्सेस की वापसी की प्रक्रिया शुरू करेगा।
7. ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा अमेरिका समझौते का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी बताया जा रहा है कि अमेरिका भविष्य में ईरान के घरेलू राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
8. पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य विस्तार पर रोक अमेरिका पश्चिम एशिया में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती नहीं करेगा और क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाएगा।
9. लेबनान समेत सभी मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम लेबनान सहित विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में स्थायी सीज़फायर लागू करने की बात कही जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में शांति प्रक्रिया को बल मिल सकता है।
10. अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा समझौते के अनुसार अमेरिका भविष्य में ईरान पर नए आर्थिक या व्यापारिक प्रतिबंध लगाने से परहेज करेगा, जिससे दोनों देशों के संबंध सामान्य होने का रास्ता खुल सकता है।
वैश्विक राजनीति पर असर
यदि यह समझौता घोषित स्वरूप में लागू होता है, तो इसका प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से वैश्विक तेल कीमतों में राहत आ सकती है, समुद्री व्यापार सामान्य हो सकता है और भारत सहित कई ऊर्जा आयातक देशों को सीधा लाभ मिल सकता है। साथ ही पश्चिम एशिया में वर्षों से चले आ रहे सैन्य तनाव में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
हालांकि इन सभी बिंदुओं की अंतिम और स्वतंत्र पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज जारी होने के बाद ही संभव होगी। फिलहाल 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह समझौता पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकता है।




