Home » Politics » RSS से हिसाब-किताब मांगकर प्रियांक खड़गे ने छेड़ी नई बहस, मोहन भागवत को भेजा सवालों से भरा पत्र

RSS से हिसाब-किताब मांगकर प्रियांक खड़गे ने छेड़ी नई बहस, मोहन भागवत को भेजा सवालों से भरा पत्र

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 16 जून 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के बीच कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने सरसंघचालक मोहन भागवत को एक पत्र भेजकर बड़ा राजनीतिक और वैचारिक विवाद खड़ा कर दिया है। खड़गे ने संघ की संगठनात्मक संरचना, कानूनी स्थिति, आय के स्रोत, गुरुदक्षिणा, आयकर भुगतान, सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति और वित्तीय पारदर्शिता जैसे कई मुद्दों पर विस्तृत जानकारी मांगी है। उनके इस पत्र ने देश के सबसे बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन की जवाबदेही और कानूनी स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

प्रियांक खड़गे ने अपने पत्र में लिखा है कि RSS स्वयं दावा करता है कि उसके देशभर में हजारों शाखाएं और लाखों स्वयंसेवक हैं तथा उसका सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में व्यापक प्रभाव है। ऐसे में इतना बड़ा संगठन किन कानूनी प्रावधानों के तहत काम करता है, उसकी जवाबदेही किसके प्रति है और उसकी वित्तीय व्यवस्था कैसे संचालित होती है, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। खड़गे का तर्क है कि जब एनजीओ, ट्रस्ट, धार्मिक संस्थाएं, कंपनियां और अन्य संगठन अपने वित्तीय और प्रशासनिक विवरण सार्वजनिक करने के लिए बाध्य हैं, तो RSS को भी उसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

पत्र में सबसे बड़ा सवाल RSS के कानूनी स्वरूप को लेकर उठाया गया है। खड़गे ने पूछा है कि संघ किस कानून के तहत संचालित होता है, उसका पंजीकरण किस रूप में है और यदि उसका कोई औपचारिक पंजीकरण नहीं है तो इसका कानूनी आधार क्या है। उन्होंने संघ से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि गुरुदक्षिणा और अन्य आर्थिक सहयोग किन स्रोतों से प्राप्त होते हैं, उनका लेखा-जोखा कैसे रखा जाता है और क्या सभी लागू करों का भुगतान कानून के अनुसार किया जाता है।

खड़गे ने यह भी कहा कि संघ नियमित रूप से बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम, पथ संचलन, शाखाएं और सामूहिक आयोजन करता है। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि इन कार्यक्रमों के लिए कौन-कौन सी प्रशासनिक और कानूनी अनुमतियां ली जाती हैं तथा उनकी निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था क्या है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संस्था इतनी बड़ी और प्रभावशाली होने के बावजूद सार्वजनिक जांच और पारदर्शिता से ऊपर नहीं हो सकती।

राजनीतिक हलकों में इस पत्र को संघ और भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के नए वैचारिक अभियान के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस समर्थक इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बता रहे हैं, जबकि संघ और भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक प्रचार और अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश करार दे रहे हैं। फिलहाल RSS की ओर से इस पत्र पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मोहन भागवत और RSS नेतृत्व इन सवालों का क्या जवाब देता है। यदि संघ विस्तृत प्रतिक्रिया देता है तो देश में संगठनात्मक पारदर्शिता पर एक नई बहस शुरू हो सकती है, और यदि जवाब नहीं आता तो विपक्ष इस मुद्दे को और अधिक आक्रामक तरीके से उठाने की कोशिश कर सकता है। फिलहाल प्रियांक खड़गे का यह पत्र राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted